Bihar Police: खत्म हुआ मुख्यालय का चक्कर! बिहार पुलिस को बड़ी राहत, दैनिक विराम भत्ता की स्वीकृति अब देंगे IG और DIG

Bihar Police: बिहार की सियासी-प्रशासनिक फिज़ा में पुलिस महकमे को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है, जिसे वर्दीधारियों के लिए राहत की सांस माना जा रहा है।

Big Relief for Bihar Police on Daily Allowance
बिहार पुलिस को बड़ी राहत- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Police: बिहार की सियासी-प्रशासनिक फिज़ा में पुलिस महकमे को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है, जिसे वर्दीधारियों के लिए राहत की सांस माना जा रहा है। अब सिपाही से लेकर पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) स्तर तक के अफसरों को 10 दिन या उससे अधिक समय के दैनिक विराम भत्ता की मंजूरी के लिए पुलिस मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे।

डॉ. कमल किशोर सिंह, एडीजी (बजट/अपील/कल्याण), ने आदेश जारी कर इस अधिकार का विकेंद्रीकरण कर दिया है। अब यह पूर्ण शक्ति संबंधित आईजी (पुलिस महानिरीक्षक) और डीआईजी (उप-महानिरीक्षक) को सौंप दी गई है। यानी फैसले अब जिलों और रेंज स्तर पर ही होंगे, जिससे प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस नए प्रावधान के तहत राज्य की सभी इकाइयों रेल पुलिस समेत में यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू होगी। बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के मंडलीय डीआईजी को भी यही अधिकार प्रदान किया गया है। इस प्रशासनिक कदम को वित्त विभाग की सहमति भी हासिल है, जिससे यह फैसला महज विभागीय निर्देश नहीं बल्कि विधिवत अनुमोदित व्यवस्था बन गया है।

अब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने के कारण विराम भत्ता की स्वीकृति को लेकर अक्सर उलझन और देरी होती थी। फाइलें मुख्यालय के स्तर पर अटक जाती थीं और मार्गदर्शन बार-बार मांगा जाता था। इससे जवानों और अधिकारियों में असंतोष की स्थिति बनती थी।

इस स्थायी समाधान के जरिए पुलिस नेतृत्व ने संदेश दिया है कि व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाया जा रहा है। राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह कदम प्रशासनिक सुधार और अधिकारों के विकेंद्रीकरण की दिशा में बड़ा दांव माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला महकमे की कार्यकुशलता को नई रफ्तार देगा? फिलहाल वर्दीधारियों के बीच इसे एक राहत भरा और स्वागतयोग्य कदम बताया जा रहा है, जो सिस्टम को चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद का हिस्सा है।