Bihar cabinet expansion: गांधी मैदान सील, बिहार में कैबिनेट विस्तार की तैयारियां तेज, भव्य शपथ ग्रहण में शामिल होंगे पीएम मोदी!सम्राट कैबिनेट विस्तार में इन बड़े चेहरों की छुट्टी तय?

Bihar cabinet expansion: सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार का कैबिनेट विस्तार अब किसी भी वक्त ऐलान हो सकता है, और इसके लिए गांधी मैदान को पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में तब्दील कर दिया गया है।

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Bihar cabinet expansion: बिहार की सियासत में इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। सत्ता के गलियारों में नामों की फेहरिस्त घूम रही है और हर चेहरा अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। खासकर भाजपा और जदयू के भीतर मंथन का दौर तेज हो गया है। बिहार की सियासत में फिर से हलचल तेज हो गई है और सत्ता के गलियारों में बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार का कैबिनेट विस्तार अब किसी भी वक्त ऐलान हो सकता है, और इसके लिए गांधी मैदान को पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में तब्दील कर दिया गया है। सूत्रों की मानें तो 6 मई के बाद कभी भी यह सियासी समारोह हो सकता है। हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने अमितशाह और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर मंत्रियों की सूची पर आखिरी मुहर लगा दी है। अब बस ऐलान का इंतजार है।

इस बार का कैबिनेट विस्तार सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि पावर गेम का बड़ा संकेत माना जा रहा है। चर्चा है कि करीब 30 से 40 प्रतिशत मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह नए, युवा और ऊर्जावान चेहरों को मौका दिया जाएगा। इसके साथ ही जातीय समीकरणों को साधने की पूरी रणनीति तैयार की गई है, ताकि हर वर्ग को संतुष्ट किया जा सके।राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि चिराग पासवान की पार्टी और जीतन राम मांझी की हम से भी नए चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिल सकती है। यानी गठबंधन की ‘केमिस्ट्री’ को मजबूत करने की पूरी कवायद जारी है। हालांकि, अंदरखाने से जो संकेत मिल रहे हैं, उसके मुताबिक इस बार पुराने चेहरों की संख्या सीमित रह सकती है और ज्यादातर नए के साथ पुराने, अनुभवी नेताओं की वापसी तय मानी जा रही है। इसका साफ मतलब है कि नेतृत्व फिलहाल स्थिरता और अनुभव को प्राथमिकता देना चाहता है।

बीजेपी खेमे की बात करें तो जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें दिलीप जयसवाल, मंगल पांडे, संजय जयसवाल, नीतीश मिश्रा, जनक राम और नीरज कुमार बब्लू शामिल हैं। इसके साथही पार्टी संगठन से जुड़े कुछ नए चेहरों को भी मौका देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बैठाया जा सके। सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बार किसी महिला नेता या युवा चेहरे को शामिल कर एक नया और सकारात्मक राजनीतिक संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे सामाजिक संतुलन और चुनावी समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है।

इस पूरे सियासी घटनाक्रम में सबसे ज्यादा नजरें विजय कुमार सिन्हा पर टिकी हुई हैं। पूर्व डिप्टी सीएम के तौर पर उन्होंने राजस्व एवं भूमि सुधार और खनन जैसे अहम विभाग संभाले थे और उनके कई फैसले सुर्खियों में रहे थे।लेकिन नई सरकार द्वारा उनके कुछ फैसलों को पलटने और विभागीय फेरबदल के बाद अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या विजय सिन्हा को फिर से वही अहम जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी या उन्हें किसी नई भूमिका में लाया जाएगा।

वहीं जदयू में भी संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर गहन मंथन जारी है। पार्टी अनुभव और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए अशोक चौधरी, लेशी सिंह और श्रवण कुमार जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में बरकरार रख सकती है। साथ ही कुछ नए चेहरों को भी शामिल कर संगठन को मजबूती देने की रणनीति बनाई जा रही है।

इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह को मेगा इवेंट बनाने की तैयारी है। खबर है कि पीएम मोदी भी इसमें शिरकत कर सकते हैं, जिससे यह आयोजन और भी हाई-प्रोफाइल हो जाएगा। एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और कई बड़े नेता भी इस मंच पर नजर आ सकते हैं।

गांधी मैदान में विशाल हैंगर और भव्य स्टेज तैयार किया जा रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बंद कर दी गई है, वहीं ट्रैफिक व्यवस्था में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं। बिहार में यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ सरकार का विस्तार नहीं, बल्कि सियासी शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बनने जा रहा है जहां से आने वाले चुनावी समीकरणों की नई कहानी लिखी जाएगी।बिहार की सियासत में कौन बनेगा मंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार है, और हर दिन नई चर्चाएं इस राजनीतिक ड्रामे को और दिलचस्प बना रही हैं।