बिहार कैबिनेट में ठेका बहाली पर घमासान: दो वरिष्ठ मंत्रियों में तीखी बहस, CM को करना पड़ा हस्तक्षेप

रिटायर्ड अफसरों को फिर से ठेके (संविदा) पर रखने के प्रस्ताव को लेकर दो वरिष्ठ मंत्रियों में तीखी नोकझोंक हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि खुद मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। जानिए किस अधिकारी के प्रस्ताव पर मचा बवाल!

Bihar Cabinet Controversy:
बिहार कैबिनेट में ठेका बहाली पर घमासान: दो वरिष्ठ मंत्रियों में तीखी बहस- फोटो : news 4 nation AI

बिहार कैबिनेट की बैठक में सेवानिवृत्त अधिकारियों के संविदा नियोजन (ठेका प्रथा) के प्रस्ताव को लेकर दो वरिष्ठ मंत्रियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। संसदीय कार्य विभाग द्वारा 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हुई बिहार विधानसभा सचिवालय की निदेशक पूनम कुमारी सिन्हा के एक साल के संविदा पुनर्नियोजन का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। इस प्रस्ताव पर भाजपा कोटे के एक वरिष्ठ मंत्री ने तीखा विरोध जताया और कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों को बार-बार ठेके पर रखने से सरकार की साख और साफ़-सुथरी छवि पर बुरा असर पड़ रहा है। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा।

 

सरकार की साख और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर उठाए                                                                                                                                                                                                                                

 विरोध जता रहे वरिष्ठ मंत्री का तर्क था कि अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के तुरंत बाद पुनर्नियोजन की परंपरा से योग्य और कार्यरत अधिकारियों के बीच असंतोष पनप रहा है।उन्होंने पूर्व के मामलों जैसे भवन निर्माण विभाग के संविदा अधिकारी के परिसरों पर छापेमारी में करोड़ों रुपये की बरामदगी और केंद्रीय चयन परिषद में पर्चा लीक कांड जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि संविदा पर रखे गए अधिकारियों के कारण पूर्व में भी सरकार की फजीहत हो चुकी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे निर्णयों से एनडीए सरकार और पार्टी की छवि धूमिल होती है, इसलिए इस प्रथा पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

 

जेडीयू और भाजपा कोटे के मंत्रियों के बीच हुआ तीखा जुबानी वार-पलटवार

बैठक के दौरान जब वरिष्ठ मंत्री ने संविदा नियोजन का विरोध किया, तो जदयू कोटे के वरिष्ठतम मंत्री ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब पूरी कैबिनेट को कोई समस्या नहीं है, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से ऐतराज क्यों है।उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यहाँ तक कह दिया कि यदि प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है तो वे इस्तीफा दे सकते हैं।इस पर पलटवार करते हुए भाजपा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि वे किसी की सलाह से नहीं बल्कि अपनी पार्टी के निर्णय से मंत्री बने हैं और किहालांकि, बाद में स्थिति को शांत करने के लिए वरिष्ठतम मंत्री ने यह कहकर बात संभाली कि वे केवल परिहास कर रहे थे।


असंतोष के बीच आखिरकार प्रस्ताव को मिली मंजूरी

तीखे हंगामे और नोकझोंक के बावजूद, संबंधित विभाग और प्रस्ताव के समर्थकों से सहमति लेकर इस प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृति प्रदान कर दी गई।निर्णय के तहत सेवानिवृत्त अधिकारी को 1 सितंबर से अगले 1 वर्ष के लिए संविदा के आधार पर पुनः नियोजित कर दिया गया है। इस विवाद के सार्वजनिक होने के बाद राज्य में प्रशासनिक पदों पर कार्यवाहक व संविदा नियोजन व्यवस्था तथा योग्य कार्यरत अधिकारियों की उपेक्षा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस छिड़ गई है।