बिहार में जनगणना 2027 का बिगुल: 17 अप्रैल से शुरू होगी डिजिटल गणना, मुख्य सचिव ने सटीकता पर दिया जोर

पटना में आयोजित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में आगामी जनगणना 2027 को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इसे 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक आधारभूत स्तंभ बताया है।

  बिहार में जनगणना 2027 का बिगुल: 17 अप्रैल से शुरू होगी डिज

Patna : भारत की जनगणना 2027 को सफलतापूर्वक और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए बिहार प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह तैयार है। पटना में आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत ने घोषणा की कि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जो राष्ट्र की नीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी। 

15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद शुरुआत

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना का कार्य समय पर नहीं हो सका था, लेकिन अब 15 वर्षों के अंतराल के बाद इसकी औपचारिक शुरुआत हो रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए आंकड़ों की शुद्धता, पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित की जाए। 

पहली बार पूर्णतः डिजिटल होगी प्रक्रिया


देश के इतिहास में पहली बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और डिजिटल होगी। डेटा संकलन के लिए मोबाइल ऐप और सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CMMS) का उपयोग किया जाएगा। इससे आंकड़ों का संग्रह अधिक तेज और पारदर्शी होगा, जिससे डेटा की विश्वसनीयता बढ़ेगी। 

महत्वपूर्ण तिथियां और सर्वेक्षण का चरण


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने जनगणना का विस्तृत शिड्यूल साझा किया है:

  • स्व-गणना (Self-Enumeration): मोबाइल ऐप के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी 17 अप्रैल 2026 से 01 मई 2026 के बीच दर्ज कर सकेंगे। 
  • घर-घर सर्वेक्षण: प्रगणक (Enumerators) द्वारा भौतिक रूप से घर-घर जाकर डेटा संकलन का कार्य 02 मई 2026 से 31 मई 2026 तक किया जाएगा। 


मकान सूचीकरण और 33 प्रकार के प्रश्न


जनगणना के पहले चरण में मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक परिवार से कुल 33 प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे। ये प्रश्न मुख्य रूप से मकान की स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और घरेलू उपकरणों की उपलब्धता से संबंधित होंगे। 

अधिकारियों की जवाबदेही और समन्वय

सम्मेलन में राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान फील्ड गतिविधियों में आने वाली चुनौतियों, अंतर-एजेंसी समन्वय और जन-जागरूकता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को संकल्प दिलाया गया कि वे तकनीक का बेहतर उपयोग कर इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को समयबद्ध तरीके से पूरा करेंगे। 

Report - Bandana sharma