Bihar Teachers Leave Rules:बिहार में शिक्षकों की छुट्टी के बदले नियम, अब ई-शिक्षाकोष से ही मिलेगी मंजूरी
Bihar Teachers Leave Rules: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के अवकाश लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। ...
Bihar Teachers Leave Rules: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के अवकाश लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब शिक्षकों की छुट्टियां केवल ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकृत होंगी। मौखिक अनुरोध या कागज पर दिए गए आवेदन मान्य नहीं होंगे। शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के पीछे पारदर्शिता बढ़ाने, शिक्षकों की उपस्थिति पर निगरानी मजबूत करने और फर्जी हाजिरी जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाने का उद्देश्य बताया है। नए नियमों के तहत छुट्टी के आवेदन से लेकर मंजूरी तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
अब पोर्टल से ही करना होगा छुट्टी का आवेदन
नई व्यवस्था के अनुसार, सरकारी स्कूलों के शिक्षक ई-शिक्षाकोष पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से अवकाश के लिए आवेदन करेंगे। बिना पूर्व स्वीकृति के छुट्टी पर रहने की स्थिति में संबंधित शिक्षक के वेतन पर रोक लग सकती है। साथ ही, इसे सेवा में व्यवधान के रूप में भी दर्ज किया जा सकता है।विभाग ने बिहार सेवा संहिता के नियम-152 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि छुट्टी कर्मचारी का स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं है। इसलिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना और सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी होगा।
नए शिक्षकों को तीन साल तक नहीं मिलेगा EL
अवकाश के नियमों में नए शिक्षकों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, नए शिक्षकों को शुरुआती तीन वर्षों तक उपार्जित अवकाश यानी Earned Leave (EL) का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, 11 महीने काम करने पर एक महीने के बिना वेतन वाले अवकाश का प्रावधान बताया गया है।नियमों के मुताबिक, शिक्षक एक बार में अधिकतम दो महीने तक का अवकाश ले सकेंगे। हालांकि, अलग-अलग प्रकार की छुट्टियों की पात्रता और उनकी मंजूरी संबंधित सेवा नियमों के अनुसार होगी।
आकस्मिक और विशेष अवकाश पर उसी दिन फैसला
विभाग ने आकस्मिक और विशेष अवकाश के आवेदनों के निपटारे के लिए समय-सीमा निर्धारित की है। ऐसे आवेदनों पर प्रधानाध्यापक या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को उसी दिन निर्णय लेना होगा। इससे शिक्षकों को छुट्टी की मंजूरी के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।वहीं, मातृत्व अवकाश, शिशु देखभाल अवकाश और चिकित्सा अवकाश से जुड़े आवेदनों के लिए अलग प्रक्रिया तय की गई है। संबंधित आवेदन तीन कार्य दिवसों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास भेजने होंगे। यदि निर्धारित अवधि में आवेदन आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो वह स्वतः डीईओ के पास चला जाएगा।
डीईओ को सात कार्य दिवसों में देनी होगी मंजूरी
नई व्यवस्था के तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी को संबंधित अवकाश आवेदन पर अधिकतम सात कार्य दिवसों के भीतर निर्णय लेना होगा। आवेदन के निपटारे में देरी होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि अवकाश प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आवेदन ऑनलाइन होंगे और अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर उन पर फैसला लेना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
शिक्षा विभाग की इस पहल से छुट्टी के आवेदनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे आवेदन की स्थिति, मंजूरी और देरी की निगरानी करना आसान होगा। साथ ही, मौखिक अनुमति या कागजी प्रक्रिया के कारण पैदा होने वाली अस्पष्टता को कम करने में मदद मिल सकती है। बिहार के सरकारी स्कूलों में अवकाश व्यवस्था को ऑनलाइन और समयबद्ध बनाने की दिशा में यह अहम बदलाव है। शिक्षकों को अब छुट्टी लेने से पहले ई-शिक्षाकोष के माध्यम से आवेदन करना होगा, जबकि अधिकारियों को निर्धारित समय में उस पर निर्णय देना होगा। नए प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों, दोनों को नियमों का पालन करना जरूरी होगा।