Bihar Judicial Reforms: अदालतों से तारीख पर तारीख का दौर खत्म, सरकारी गवाहों की गैरहाजिरी पर कसा शिकंजा, अब थाने से होगी गवाही
Bihar Judicial Reforms: सूबे की अदालतों में बरसों-बरस से लटके मुकदमों के जल्द से जल्द निपटारे और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बिहार सरकार ने बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
Bihar Judicial Reforms: सूबे की अदालतों में बरसों-बरस से लटके मुकदमों के जल्द से जल्द निपटारे और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बिहार सरकार ने बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब डाॅक्टरों, पुलिसकर्मियों और दीगर सरकारी आला अफसरों की गैरहाजिरी के सबब अदालतों में चलने वाला 'तारीख पर तारीख' का पुराना और ढीला-ढाला रवैया पूरी तरह बंद होने जा रहा है। राज्य सरकार ने साफ लफ़्ज़ों में हिदायत दी है कि अगर दो बार समन भेजे जाने के बावजूद कोई भी सरकारी गवाह अदालत में हाजिर नहीं होता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गृह विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लंबित मामलों (पेंडिंग केसेज) की रफ्तार बढ़ाने के कड़े निर्देश जारी किए। विभागीय तफ्तीश में यह बात खुलकर सामने आई कि मुकदमों के सालों-साल खिंचने की एक सबसे बड़ी वजह सरकारी गवाहों का ऐन वक्त पर अदालत से गायब रहना है। इस पर नकेल कसने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भी दिशा-निर्देश जारी करने का हुक्म दिया गया है। इसके अलावा, कांड से जुड़े तमाम गवाहों का नाम, मुकम्मल पता और मोबाइल नंबर पूरी तरह अपडेट रखने के लिए उनके पहचान पत्रों को बायोमीट्रिक सत्यापन प्रणाली (डिजिटल डेटाबेस) से जोड़ने का फरमान सुनाया गया है।
ट्रायल प्रक्रिया में क्रांति लाने के लिए राज्य सरकार 'न्याय श्रुति' नाम की ऑनलाइन कोर्ट प्रणाली को लागू करने की मुकम्मल तैयारी कर चुकी है। राजधानी पटना में किया गया इसका ट्रायल बेहद कामयाब रहा है। पहले सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को अपने-अपने इलाके के कम से कम एक थाने को इस ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ने को कहा गया है।
अब गवाही की तमाम कानूनी कार्रवाई के लिए डाॅक्टरों या अफसरों को बार-बार अदालत के चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं होगी। वे अपने नजदीकी थाने, प्रखंड (ब्लॉक) कार्यालय या अस्पताल से ही ऑनलाइन माध्यम से सीधी गवाही दर्ज करा सकेंगे। इस डिजिटल व्यवस्था को और पुख्ता बनाने के लिए आपराधिक मामलों की तफ्तीश करने वाले तफ्तीशी अफसरों को ई-साइन की सहूलियत देने का भी बड़ा फैसला लिया गया है।