Patna NEET student death: "बेटी बचाओ या...: बिहार में सिस्टम की बलि चढ़ती बेटियाँ, मौत के 11 दिन बाद भी एसआईटी पर्दा उठाने में विफल, इस बदहाल सच्चाई ने सत्ता और कानून को झकझोर दिया

देश की बेटियां हर क्षेत्र में नित नए रिकॉर्ड बना रही हैं, लेकिन सवाल यह है कि बिहार में बेटियां कितनी सुरक्षित हैं।

Bihar Daughters Fall Prey to Failing System SIT Fails to Del
बिहार में सिस्टम की बलि चढ़ती बेटियाँ, मौत के 11 दिन बाद भी एसआईटी पर्दा उठाने में विफल- फोटो : social Media

Patna NEET student death: प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा कि बेटी को लक्ष्मी मानने वाले भारत में 11 साल पहले आज ही के दिन बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत हुई थी। देश की बेटियां हर क्षेत्र में नित नए रिकॉर्ड बना रही हैं, लेकिन सवाल यह है कि बिहार में बेटियां कितनी सुरक्षित हैं। पटना में नीट की तैयारी कर रही दो छात्राओं की कथित आत्महत्या ने पूरे राज्य को हिला दिया है। परिजन इसे साजिशन हत्या करार दे रहे हैं, लेकिन पुलिस अब तक पर्दा उठाने में विफल है।

मामला 6 जनवरी से शुरू होता है, जब छात्रा चित्रगुप्त नगर स्थित शंभु गर्ल्स हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली। एक दिन पहले 5 जनवरी को वह पटना आई थी। पहले उसे कंकड़बाग स्थित सहज अस्पताल ले जाया गया और बाद में प्रभात मेमोरियल में भर्ती कराया गया। 11 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने परिजनों के आरोपों को बल दिया शरीर पर जख्म, बल प्रयोग और जबरन संबंध बनाने के संकेत मिले।

परिजनों ने चित्रगुप्त नगर थाने में FIR दर्ज कराई, जिसमें हॉस्टल में दुष्कर्म के बाद हत्या की बात कही गई। गृह मंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर डीजीपी विनय कुमार ने SIT का गठन किया। SIT घटनास्थल की फोरेंसिक जांच कर रही है और अस्पतालों में पूछताछ कर रही है, लेकिन 11 दिन बीत जाने के बाद भी ठोस जवाब नहीं मिल पाया है।

इस बीच बिहार में समाज और राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है। विपक्षी दल सरकार की विफलता का रौब दिखा रहे हैं। छात्राओं के परिजनों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक बेटियां असुरक्षित रहेंगी और अपराधियों को संरक्षण मिलता रहेगा। उनका कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम उठाए जाते, तो शायद बेटियों को इंसाफ मिलने की उम्मीद बनी रहती।

प्रधानमंत्री की नसीहत और राज्य की हकीकत में खाई साफ दिख रही है, वैदिक काल से चली आ रही कन्या को लक्ष्मी मानने की परंपरा आज भी बिहार में केवल नाम की रह गई है। बेटियों के जीवन और सुरक्षा के लिए सिस्टम और कानून की जद्दोजहद अभी भी जारी है, और परिजन हर कदम पर इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं।

बिहार की बेटियों की सुरक्षा अब सिर्फ नारे नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की मांग बन चुकी है। सत्ता, पुलिस और समाज तीनों पर अब जवाबदेही का बड़ा सवाल खड़ा है।