बिहार में गहराने लगा सूखे का संकट ! 50 फीसदी तक कम बारिश, नदियों का जलस्तर घटा, भूजल भी नीचे खिसका
मौसम विभाग के अनुसार बिहार के अधिकांश जिलों में अब भी सामान्य से 30 से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
Bihar Rainfall Deficit: बिहार में मानसून की सुस्त रफ्तार अब चिंता का विषय बनती जा रही है। राज्य में सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। इसका असर न सिर्फ खेती पर पड़ रहा है, बल्कि नदियों के जलस्तर और भूजल स्तर में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग और जल संसाधन विभाग की रिपोर्टों के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। राज्य में मानसून समय पर पहुंचा था, लेकिन इसके बाद बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गईं। 6 जुलाई तक बिहार में सामान्य 230.1 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 103 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 52 से 55 प्रतिशत कम है।
हालांकि मंगलवार से मौसम ने कुछ राहत दी और पटना, बेतिया, कटिहार, मधुबनी, सासाराम और औरंगाबाद समेत करीब 15 जिलों में बारिश हुई। राजधानी पटना में भी बुधवार सुबह तक बादल छाए रहे और कई इलाकों में रुक-रुक कर वर्षा हुई। हालांकि अभी राज्य को झमाझम बारिश का इंतजार है।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश जिलों में अब भी सामान्य से 30 से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पटना, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, जहानाबाद, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर और रोहतास जैसे जिलों में लंबे समय से पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसक जाने और बंगाल की खाड़ी में मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र नहीं बनने के कारण नमी से भरे बादल बिहार तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसी वजह से बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन व्यापक बारिश नहीं हो रही।
आधे से ज्यादा नदियों का जलस्तर घटा
बारिश की कमी का असर राज्य की नदी प्रणाली पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बिहार की आधे से अधिक नदियों का जलस्तर सामान्य से नीचे चला गया है। कई छोटी नदियों में पानी का बहाव काफी कम हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर नदी का तल भी दिखाई देने लगा है। गंडक, पुनपुन, फल्गु, सकरी, किऊल, बदुआ, चानन और उनकी सहायक नदियों में जलस्तर लगातार घट रहा है। हालांकि गंगा, कोसी और बागमती जैसी बड़ी नदियां अभी सामान्य स्तर पर बह रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो इन नदियों पर भी असर पड़ सकता है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल राज्य में बाढ़ का कोई खतरा नहीं है, लेकिन यदि वर्षा की कमी जारी रही तो सिंचाई परियोजनियों और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
धान की रोपनी पर संकट
बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। यह धान की रोपाई का प्रमुख समय है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं और कई जिलों में रोपनी प्रभावित हो रही है। किसान निजी बोरवेल और डीजल चालित पंपों के सहारे सिंचाई करने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और छोटे एवं सीमांत किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
भूजल स्तर में भी आई गिरावट
कम बारिश का असर भूजल स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण प्राकृतिक रूप से भूजल रिचार्ज की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। कई ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप और पारंपरिक कुओं का जलस्तर नीचे जाने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के शेष महीनों में भी सामान्य से कम बारिश होती है तो आने वाले महीनों में बिहार के कई हिस्सों में पेयजल संकट गहरा सकता है। ऐसे में राज्य के लिए समय पर और पर्याप्त मानसूनी बारिश बेहद जरूरी हो गई है।