पाप का घड़ा फूटा: रिटायरमेंट के बाद भी नहीं बचे शिक्षा विभाग के 4 बड़े साहब, भ्रष्टाचार और मनमानी पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक!

शिक्षा विभाग ने भ्रष्टाचार और पदीय कर्तव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। विभाग ने सेवानिवृत्त हो चुके चार वरिष्ठ अधिकारियों,जिसमें तत्कालीन उप सचिव, DEO, DPO और RDDE शामिल हैं—की पेंशन में भारी कटौती का आदेश जारी कर दिया है

पाप का घड़ा फूटा: रिटायरमेंट के बाद भी नहीं बचे शिक्षा विभाग

Patna  - बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है । सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी गुनाहगार अधिकारी कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाएंगे । विभाग ने 13 मार्च 2026 को एक साथ चार अलग-अलग संकल्प जारी कर भ्रष्टाचार में डूबे और अपने पदीय कर्तव्यों का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों की पेंशन में भारी कटौती की शास्ति (दंड) लगा दी है 

रिश्वतखोर उप सचिव की पेंशन पूरी तरह खत्म

इस कार्रवाई में सबसे बड़ा झटका तत्कालीन उप सचिव-सह-प्रभारी संयुक्त सचिव (बिहार विद्यालय परीक्षा समिति) सुनील कुमार को लगा है । निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने उन्हें एक स्कूल की सम्बद्धता के बदले 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था । सरकार ने उनके इस कृत्य को "गंभीरतम दोष" मानते हुए उनकी पेंशन राशि में 100 प्रतिशत की कटौती का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है । यानी अब उन्हें जीवन भर पेंशन का एक रुपया भी नहीं मिलेगा 

जमुई के डीपीओ पर वेतन घोटाले की गाज

जमुई के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) श्री शिव कुमार शर्मा के खिलाफ भी विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है । उन पर आरोप था कि उन्होंने बिना नियोजन और बिना योगदान के शिक्षकों का वेतन भुगतान कर दिया और नियमों को ताक पर रखकर शिक्षकों का ट्रांसफर किया । इस धांधली के लिए उन पर पेंशन से 5 वर्षों के लिए 5 प्रतिशत की कटौती की सजा मुकर्रर की गई है । उनके खिलाफ इस मामले में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज है 

DEO की 'सुस्ती' पर लगा भारी जुर्माना

शिक्षा विभाग ने जमुई के ही तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) श्री कपिलदेव तिवारी को भी नहीं बख्शा । उन पर आरोप है कि उन्होंने समाचार पत्रों में प्रकाशित "फर्जी वेतन भुगतान" की खबरों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और उच्चाधिकारियों को गुमराह करने वाले भ्रामक प्रतिवेदन भेजे । विभाग ने पाया कि उनकी निष्क्रियता ने अनियमितताओं को बढ़ावा दिया, जिसके चलते उनकी पेंशन से भी 5 वर्षों तक 5 प्रतिशत की राशि काटी जाएगी 

अदालती आदेश की अवहेलना करने वाले RDDE भी नपे

भागलपुर प्रमंडल के तत्कालीन क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (RDDE) श्री सत्येंद्र झा को कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करना भारी पड़ गया । उन पर आरोप था कि उन्होंने माननीय न्यायालय और वरीय अधिकारियों के बार-बार निर्देश देने के बावजूद एक कर्मी के जीवन निर्वाह भत्ते का भुगतान नहीं किया और अनावश्यक पत्राचार कर मामले को लटकाया । इस अनुशासनहीनता के लिए उनकी पेंशन से 2 वर्षों तक 5 प्रतिशत की कटौती करने का दंड दिया गया है 

भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' का कड़ा संदेश

बिहार शिक्षा विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने सचिवालय से लेकर जिला कार्यालयों तक हड़कंप मचा दिया है । विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्ति का मतलब यह नहीं है कि आपके पुराने पाप धुल गए हैं । सभी चारों मामलों में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से परामर्श लेकर यह दंड सुनिश्चित किया गया है । सरकार की यह कार्रवाई 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा है, जो अन्य लापरवाह अधिकारियों के लिए एक खुली चेतावनी है