बिहार के 4602 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता होगी रद्द; शिक्षा विभाग का बड़ा हंटर, लापरवाह बीईओ भी नपेंगे

बिहार के शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के नियमों की अनदेखी करने वाले निजी स्कूलों पर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने राज्य के 4602 निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति (मान्यता) रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बिहार के 4602 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता होगी रद्द; शिक्षा

Patna - : बिहार में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत अपनी नामांकन एवं संसाधन क्षमता (इनटेक कैपेसिटी) की जानकारी साझा न करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है。 शिक्षा विभाग ने ऐसे 4602 निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति रद्द करने का निर्देश जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दिया है。

नियमों की अनदेखी पड़ी भारी

विभाग ने सभी प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालयों को 25 जनवरी तक पोर्टल पर अपनी इनटेक कैपेसिटी और संसाधनों की जानकारी अपलोड करने का आदेश दिया था。 तय समय सीमा बीतने के बाद भी 4602 स्कूलों ने यह जानकारी पोर्टल पर नहीं भरी。 इसके मद्देनजर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. बी. राजेन्दर ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को स्पष्टीकरण पूछते हुए 14 फरवरी तक इन सभी मामलों के निपटारे का कड़ा निर्देश दिया है。

लापरवाह अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

शिक्षा विभाग की समीक्षा में पाया गया कि केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर भी भारी देरी हो रही है।  नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्राप्त 65,505 ऑनलाइन आवेदनों में से 34,374 आवेदन अब भी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) के स्तर पर जांच के लिए लंबित हैं。 विभाग ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन कार्य में शिथिलता बरतने वाले प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी。राज्य के 3,014 अन्य निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति के मामले भी फिलहाल पोर्टल पर लंबित पाए गए हैं。


प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान की प्रक्रिया

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों के बदले निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान के लिए जिलों में जांच चल रही है。 विभाग ने उन जिलों को अविलंब जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है जहाँ से अब तक प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है, ताकि संबंधित स्कूलों को भुगतान की कार्यवाही पूरी की जा सके。