बिहार में नदियों का रौद्र रूप, गंगा के उफान से तटबंध बेहाल, अलर्ट पर रेलवे

Bihar Flood: बिहार में नदियों का मिजाज अभी भी बेहद खौफनाक बना हुआ है। गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक समेत कई नदियों और उनकी सहायक धाराओं में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ..,

Bihar Flood Alert
नदियों का रौद्र रूप- फोटो : social Media

Bihar Flood: बिहार में नदियों का मिजाज अभी भी बेहद खौफनाक बना हुआ है। गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक समेत कई नदियों और उनकी सहायक धाराओं में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई इलाकों में नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, तो दूसरी तरफ तटबंधों में कटाव और टूटने की घटनाओं ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। पटना से लेकर भागलपुर, बेगूसराय, मुंगेर, खगड़िया और कटिहार तक निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है।सबसे ज्यादा चिंता भागलपुर के खरीक अंचल में सामने आ रही है, जहां काजीकौरेया-राघोपुर तटबंध पर लगातार कटाव हो रहा है। करीब 120 मीटर लंबे इस तटबंध का 30 मीटर हिस्सा रविवार देर रात कट गया था। इसके बाद मंगलवार सुबह एक और हिस्से में कटाव शुरू हुआ और करीब 20 मीटर हिस्सा और कट गया। इससे राघोपुर पंचायत में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा और पांच वार्ड प्रभावित हो गए।

पानी का दबाव बढ़ने के साथ ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई परिवार घरों से जरूरी सामान निकालकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। गांव में लगातार बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें मौके पर तैनात हैं और तटबंध को बचाने के लिए युद्धस्तर पर कवायद की जा रही है।

जल संसाधन विभाग, नवगछिया के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार के अनुसार रिंग बांध बनाने से बने दबाव के कारण सुबह करीब 10 मीटर का कटाव हुआ, जो देखते ही देखते 20 मीटर तक फैल गया। गंगा के बैकवाटर के लगातार बहाव से तटबंध के नीचे की मिट्टी खिसक रही है, जिससे करीब 120 मीटर के पूरे हिस्से पर खतरा मंडरा रहा है।

जियो बैग और ‘हाथी पांव’ से कटाव रोकने की जद्दोजहद

हालात पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने कटाव वाले हिस्से को सुरक्षित करने का काम शुरू किया है। इसके लिए ‘हाथी पांव’, यानी बांस और तार के फ्रेम में जियो बैग भरकर नदी के कटाव को रोकने की कोशिश की जा रही है। जियो बैग को मौके तक पहुंचाने के लिए करीब 100 ट्रैक्टर लगाए गए हैं।हालांकि राहत कार्य की राह भी आसान नहीं है। बांध तक पहुंचने वाली सड़क बेहद संकरी होने के कारण एक समय में सिर्फ एक ट्रैक्टर के आने-जाने की गुंजाइश है। इस वजह से जियो बैग को मौके तक पहुंचाने और उतारने में काफी वक्त लग रहा है। दूसरी तरफ गंगा की तेज धार ने बचाव दल की मुश्किल और बढ़ा दी है।

रिंग बांध निर्माण पर तेज बहाव का ब्रेक

रविवार देर रात तटबंध टूटने के बाद राघोपुर पंचायत के पांच वार्डों में बाढ़ का पानी घुस गया था। सोमवार सुबह से जिला प्रशासन और अभियंताओं की टीम टूटे हिस्से पर रिंग बांध तैयार करने में जुटी थी। लेकिन मंगलवार सुबह एक और हिस्से में कटाव शुरू होने से हालात और पेचीदा हो गए।गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज करंट के कारण रिंग बांध का निर्माण प्रभावित हुआ। पानी की धारा इतनी तेज है कि मौके पर नावों को स्थिर रखने में भी परेशानी हो रही है। यही वजह है कि मंगलवार शाम तक रिंग बांध का निर्माण पूरा नहीं हो सका।

रेलवे भी अलर्ट, 24 घंटे पटरियों की निगरानी

गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रेलवे ने भी अपनी निगरानी बढ़ा दी है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सितंबर में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कटाव और रेलवे ट्रैक के धंसने की आशंका को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे पेट्रोलिंग का निर्देश दिया गया है।रेलवे ने जरूरत पड़ने पर तत्काल इस्तेमाल के लिए स्टोन डस्ट और बालू से भरी बोरियों की व्यवस्था भी की है। जिन रेल पटरियों के आसपास पानी आने की आशंका है, वहां निगरानी बढ़ा दी गई है। पिछले कुछ वर्षों में भीषण बाढ़ के दौरान ट्रैक पर पानी चढ़ने से ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा है। इस बार रेलवे पहले से ही एहतियाती मोड में है।

बिहार में गंगा समेत प्रमुख नदियों का बढ़ता जलस्तर और तटबंधों पर लगातार हो रहा कटाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि तेज बहाव के बीच तटबंधों को सुरक्षित रखा जाए और बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए। हालात पर नजर रखी जा रही है और आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर पर निर्भर करेगा कि संकट कितना गहराता है।