अफसरों की आपसी खींचतान की भेंट चढ़े पूर्व DTO, बिना सबूत 2 साल तक घसीटे गए जांच में एक भी गवाह नहीं मिला, अब सरकार ने मांगी माफी!

बिहार में तैनात बीएएस अधिकारी मृत्युंजय कुमार को अरवल में लापरवाही के आरोपों से क्लीन चिट मिली है । जांच में आरोप साबित न होने पर सरकार ने अनुशासनिक कार्यवाही समाप्त की ।

 अफसरों की आपसी खींचतान की भेंट चढ़े पूर्व DTO, बिना सबूत 2

Patna - : बिहार सरकार ने बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मृत्युंजय कुमार को बड़ी राहत देते हुए उनके विरुद्ध चल रही अनुशासनिक कार्यवाही को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया है । अरवल में तैनाती के दौरान लगे लापरवाही और स्वेच्छाचारिता के आरोपों की जांच में उन्हें निर्दोष पाया गया है 

कार्यवाही की पृष्ठभूमि और लगाए गए आरोप

बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मृत्युंजय कुमार (कोटि क्रमांक-892/23) के विरुद्ध जुलाई 2023 में अरवल जिला प्रशासन की अनुशंसा पर आरोप-पत्र गठित किया गया था । उस समय वे जिला पंचायती राज पदाधिकारी के साथ-साथ प्रभारी जिला परिवहन पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे । उन पर मुख्य रूप से कार्यों में लापरवाही बरतने, वरीय पदाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने और मनमाने ढंग से कार्य (स्वेच्छाचारिता) करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे । 

साक्ष्यों और गवाहों का अभाव

मामले की जांच के दौरान विभाग ने जब जिला पदाधिकारी, अरवल से साक्ष्यों और गवाहों की सूची मांगी, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ । अक्टूबर 2024 में अरवल डीएम ने सूचित किया कि श्री कुमार के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित संचिका में कोई भी ठोस साक्ष्य या गवाह उपलब्ध नहीं है । परिस्थितियों के आधार पर प्रेषित आरोप-पत्र में कानूनी रूप से टिकने योग्य सबूतों की भारी कमी पाई गई 

जांच समिति ने माना 'भ्रम की स्थिति'

आरोपों की समीक्षा के लिए उप विकास आयुक्त (DDC), अरवल की अध्यक्षता में एक त्रिसदस्यीय समिति का गठन किया गया था । इस समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि श्री कुमार के विरुद्ध जो कार्रवाई शुरू की गई थी, वह संभवतः किसी तात्कालिक 'भ्रम की स्थिति' के कारण उत्पन्न हुई हो सकती है । समिति ने उनके लिखित अभिकथन और स्पष्टीकरण को संतोषजनक मानते हुए आरोपों को आधारहीन पाया । 

मुख्य सचिव की समिति ने भी दी मंजूरी

हालांकि शुरुआत में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने अनुशासनिक कार्यवाही जारी रखने की अनुशंसा की थी, जिसके बाद आयुक्त मगध प्रमंडल को जांच पदाधिकारी नियुक्त किया गया था । लेकिन नवंबर 2025 में आयुक्त कार्यालय द्वारा सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में भी श्री कुमार के विरुद्ध किसी भी आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया । इसके बाद फरवरी 2026 में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया । 

अंतिम निर्णय और भविष्य का संदर्भ

24 फरवरी 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक संकल्प के अनुसार, मृत्युंजय कुमार के विरुद्ध संचालित सभी अनुशासनिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया है । सरकार ने अपने आदेश में यह विशेष टिप्पणी भी की है कि यह राहत केवल श्री कुमार के मामले के लिए प्रभावी होगी और इसे भविष्य में किसी अन्य मामले के लिए नजीर या पूर्वोदाहरण (Precedent) नहीं माना जाएगा । 

वर्तमान पदस्थापन और आदेश का प्रसार

वर्तमान में मृत्युंजय कुमार शेखपुरा में भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के पद पर तैनात हैं । विभाग के अपर सचिव संजय कुमार द्वारा जारी इस आदेश की प्रति महालेखाकार, परिवहन विभाग के प्रधान सचिव, मगध प्रमंडल के आयुक्त और संबंधित कोषागारों को भेज दी गई है । इस आदेश के साथ ही अधिकारी के करियर पर लगे आरोपों के दाग पूरी तरह साफ हो गए हैं।