Bihar government: अब ‘सुधा’ बेचेगा बकरी का दूध! बिहार सरकार कॉम्फेड के नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी में

Bihar government: बिहार सरकार बकरी के दूध को कॉम्फेड के दूध संग्रह नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी कर रही है। योजना के तहत दूध को ‘सुधा’ ब्रांड के जरिए बेचने की तैयारी है।

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Bihar government: बिहार सरकार अब बकरी के दूध को भी संगठित दूध कारोबार से जोड़ने की तैयारी कर रही है। सरकार की योजना है कि बकरी का दूध कॉम्फेड के मौजूदा दूध संग्रह केंद्रों के जरिए इकट्ठा किया जाए। इसके बाद दूध की गुणवत्ता और बाजार की जरूरत के हिसाब से उसे तैयार करके ‘सुधा’ ब्रांड के तहत बेचा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस योजना से बकरी पालने वाले छोटे किसानों और ग्रामीण महिलाओं को नियमित आमदनी का नया जरिया मिल सकता है।

बकरीपालकों के लिए सरकार की नई योजना

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंद किशोर राम ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को इस योजना की जानकारी दी। वह बिहार पशुपालन निदेशालय और ‘द गोट ट्रस्ट’ के बीच समझौता होने के कार्यक्रम में बोल रहे थे।मंत्री ने कहा कि कम पैसे और कम संसाधनों में बकरी पाली जा सकती है। यही वजह है कि छोटे किसानों, सीमांत पशुपालकों और ग्रामीण महिलाओं के लिए बकरीपालन कमाई का अच्छा साधन बन सकता है।

‘गरीब की गाय’ को नियमित कमाई का साधन बनाने की तैयारी

नंद किशोर राम ने कहा कि बकरी को लंबे समय से ‘गरीब की गाय’ कहा जाता है। आम तौर पर लोग जरूरत पड़ने पर बकरी बेचकर पैसे जुटाते हैं। सरकार अब इस सोच को बदलना चाहती है।उन्होंने कहा कि बकरी सिर्फ जरूरत के समय बेचने वाली संपत्ति न रहे, बल्कि पशुपालकों को इससे नियमित आमदनी भी हो।

‘द गोट ट्रस्ट’ के साथ हुआ समझौता

बकरीपालकों को बेहतर तरीके से तैयार करने के लिए बिहार पशुपालन निदेशालय और ‘द गोट ट्रस्ट’ के बीच समझौता हुआ है।इस समझौते के तहत बकरीपालकों को वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालने, पशुओं की सेहत का ध्यान रखने और बेहतर प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा प्रशिक्षण और काम करने की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।‘द गोट ट्रस्ट’ इस पूरी योजना में तकनीकी मदद देगा।

गांव स्तर पर बनेंगी बकरीपालकों की समितियां

सरकार बकरीपालकों को प्रखंड स्तर पर सहकारी समितियों से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद बकरीपालकों को एक साथ लाकर उनके लिए बेहतर बाजार व्यवस्था तैयार करना है।सरकार कॉम्फेड के मौजूदा दूध संग्रह नेटवर्क का इस्तेमाल बकरी का दूध इकट्ठा करने के लिए करना चाहती है। इससे पशुपालकों को अपना दूध बेचने के लिए अलग-अलग ग्राहक खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

‘सुधा’ ब्रांड के तहत बिक सकता है बकरी का दूध

योजना के अनुसार, बकरी के दूध को संग्रह करने के बाद उसकी गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुसार प्रसंस्करण और पैकेजिंग की जाएगी। इसके बाद इसे ‘सुधा’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारने की तैयारी है।अगर योजना सफल रहती है तो बिहार में बकरी के दूध के लिए एक संगठित बाजार तैयार हो सकता है।

ग्रामीण महिलाओं को भी मिलेगा फायदा

मंत्री ने कहा कि बिहार में बकरीपालन में ग्रामीण महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। अगर बकरी के दूध से नियमित कमाई होने लगे तो इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। विभागीय सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि यह समझौता बिहार के बकरीपालकों के लिए एक नई आर्थिक व्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।