Bihar Sugar Price: चीनी की कीमतों पर बड़ा एक्शन,बिहार सरकार ने अफसरों को दिए ये सख्त आदेश

Bihar Sugar Price: बिहार में लगातार बढ़ती चीनी की कीमतों को लेकर सरकार ने अब सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। ...

Bihar Sugar Price:  चीनी की कीमतों पर बड़ा एक्शन,बिहार सरकार
चीनी के बढ़ते दाम पर सख्त सरकार- फोटो : reporter

Bihar Sugar Price: बिहार में लगातार बढ़ती चीनी की कीमतों को लेकर सरकार ने अब सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। बाजार में चीनी की कीमतों में किसी भी तरह की मनमानी, जमाखोरी या कालाबाजारी को लेकर गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने साफ कर दिया है कि सरकार किसी भी सूरत में नरमी बरतने के मूड में नहीं है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 400 टन से अधिक चीनी का स्टॉक रखने वाले व्यापारियों के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।मंत्री का यह फरमान ऐसे वक्त आया है जब बाजार में चीनी की कीमतों को लेकर लोगों के बीच बेचैनी बढ़ रही है। सरकार का दावा है कि राज्य की सभी संचालित चीनी मिलों में पर्याप्त मात्रा में चीनी का भंडार मौजूद है। ऐसे में कीमत बढ़ने की कोई जायज वजह नहीं है। सरकार का इशारा साफ है कि अगर कहीं कृत्रिम कमी पैदा कर दाम बढ़ाने की कोशिश हुई तो प्रशासन सीधे कार्रवाई के मोर्चे पर उतर आएगा।

गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, समस्तीपुर और सीतामढ़ी के जिलाधिकारियों के साथ राज्य की सभी कार्यरत चीनी मिलों के संचालकों को पत्र भेजा है। इसमें संयुक्त जांच टीम गठित करने और चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने का आदेश दिया गया है।प्रशासन अब सिर्फ कागजी आंकड़ों पर भरोसा नहीं करेगा, बल्कि गोदामों में पहुंचकर वास्तविक स्टॉक का हिसाब-किताब करेगा। जांच टीम चीनी मिलों के अलावा बड़े व्यापारियों के गोदामों का भी निरीक्षण करेगी। जिला स्तर पर एक वरीय उप समाहर्ता और प्रखंड पदाधिकारी की संयुक्त टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है।

सरकार की नजर खास तौर पर उन कारोबारियों पर है, जिनके पास तय सीमा से ज्यादा चीनी जमा है। केंद्र सरकार के निर्देश के मुताबिक 1 अगस्त 2026 से चीनी व्यापारियों के लिए 400 टन की स्टॉक होल्डिंग सीमा लागू की गई है, जो 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। अगर कोई व्यापारी निर्धारित सीमा का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।इतना ही नहीं, चीनी मिलों के स्टॉक को लेकर भी सरकार ने सख्त नियम लागू किया है। सचिव के निर्देश के मुताबिक चीनी की बिक्री के बाद मिल परिसर में अधिकतम सात दिनों तक स्टॉक रखा जा सकेगा। इससे अधिक समय तक स्टॉक रखने पर कार्रवाई का प्रावधान है। यानी अब मिलों और कारोबारियों दोनों के लिए स्टॉक का हिसाब साफ रखना जरूरी होगा।

सरकार ने यह कदम आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और चीनी नियंत्रण आदेश, 1966 के तहत उठाया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले मिल मालिकों और व्यापारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। प्रशासनिक हलकों में इसे जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ बड़ा अभियान माना जा रहा है।पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, समस्तीपुर और सीतामढ़ी को जांच के लिए विशेष रूप से चिन्हित किया गया है। ये इलाके बिहार के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं और यहां कई निजी चीनी मिलें संचालित होती हैं। लिहाजा सरकार की निगाह इन इलाकों में मौजूद स्टॉक और बाजार में चीनी की आपूर्ति पर बनी रहेगी।त्योहारों का मौसम करीब आने के साथ चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सरकार को आशंका है कि कहीं मांग बढ़ने का फायदा उठाकर कारोबारी कृत्रिम संकट पैदा न करें। इसी संभावित खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने पहले ही शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

मंत्री संजय कुमार ने दो टूक कहा है कि बिहार में चीनी की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार का दावा है कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखी जाएगी और आम लोगों को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने की कोशिश जारी रहेगी।अब निगाह जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। संयुक्त जांच टीमें गठित होने के बाद गोदामों और मिल परिसरों में निरीक्षण शुरू होगा। स्टॉक में गड़बड़ी, निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण या नियमों की अनदेखी सामने आने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर बिहार सरकार ने साफ कर दिया है कि चीनी की कालाबाजारी का खेल अब आसानी से नहीं चलेगा और जमाखोरों पर कानून का डंडा चलेगा।

रिपोर्ट- कुलदीप भारद्वाज