Bihar Liquor Smuggling: मंत्री और विभाग में ठनी! सचिव ने कंपनियों को नोटिस के वापस लेने का लिया निर्णय तो मंत्री ने जताई नाराजगी..... बढ़ा टकराव...

Bihar Liquor Smuggling: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी और काले कारोबार पर लगाम लगाने की मुहिम के बीच बड़ा प्रशासनिक उलटफेर सामने आया है। ...

Bihar Liquor Smuggling: मंत्री और विभाग में ठनी! सचिव ने कंप
मंत्री और विभाग में अनबन!- फोटो : X

Bihar Liquor Smuggling: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी और काले कारोबार पर लगाम लगाने की मुहिम के बीच बड़ा प्रशासनिक उलटफेर सामने आया है। राज्य में शराब की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पहली बार मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने 10 विदेशी शराब निर्माता कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लेकिन कंपनियों के संगठन की पक्ष रखने और विभागीय सचिव से मुलाकात के बाद इन नोटिसों को वापस लेने का फरमान जारी कर दिया गया। इस फैसले ने विभाग के भीतर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने भी नोटिस वापस लेने के निर्णय पर खुलकर नाराजगी जताई है।

10 साल बाद पहली बार शराब कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी

दरअसल, बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद दूसरे राज्यों से विदेशी शराब की खेप चोरी-छिपे राज्य में पहुंचाई जा रही है। तस्करों का सिंडिकेट अलग-अलग रास्तों से शराब की खेप बिहार में खपा रहा है। इस मामले में 11 जून को मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शराब निर्माता कंपनियों की भूमिका की जांच करने का निर्णय लिया गया था।बैठक में तय हुआ था कि अवैध शराब बरामदगी के मामलों में कंपनियों की संभावित संलिप्तता की पड़ताल होगी और जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान के जरिए जवाबदेही तय की जाएगी। इसी फैसले के बाद विभाग ने 10 विदेशी शराब निर्माता कंपनियों को नोटिस थमाया था। पिछले एक दशक में यह पहला मौका था, जब शराब कंपनियों को सीधे विभागीय कार्रवाई के दायरे में लाने की पहल हुई।

किन 10 कंपनियों को भेजा गया था नोटिस?

मद्य निषेध विभाग ने यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड, परनोड रिकार्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स लिमिटेड, रेडिको खेतान लिमिटेड, एडीएस स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड, ओएसिस डिस्टिलरीज लिमिटेड, बापुना एल्को ब्रू प्राइवेट लिमिटेड, लहाग स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड, क्वीन डिस्टिलर्स बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और जन्नत बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया था। इन कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और सिक्किम समेत दूसरे राज्यों में स्थित हैं। इन राज्यों में कानूनी रूप से निर्मित और बेची गई शराब की खेप बिहार में अवैध तरीके से पहुंचाए जाने के मामले सामने आए थे। इसी आधार पर विभाग ने कंपनियों से जवाब मांगा था।

शराब कंपनियों के संगठन की पैरवी के बाद बदला फैसला

नोटिस जारी होने के बाद शराब निर्माता कंपनियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज  ने विभाग के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। संगठन के प्रतिनिधियों ने विभागीय सचिव संजय सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अनंत एस अय्यर ने दलील दी कि केवल शराब की बोतलों पर किसी ब्रांड का नाम दर्ज होने से निर्माता कंपनी या उसके अधिकारियों को तस्करी के मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता। उनका कहना था कि दूसरे राज्यों में कानूनी तरीके से बेची गई शराब को तीसरे पक्ष के तस्कर बिहार में अवैध रूप से लाते हैं। इसमें निर्माता कंपनियों की भूमिका नहीं होती। इसके बाद 14 अक्टूबर को होने वाली समीक्षा बैठक में कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया गया। विभागीय सचिव ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस वापस लेने का निर्देश दिया।

मंत्री मदन सहनी ने फैसले पर जताई नाराजगी

इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय तालमेल और फैसले की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्री मदन सहनी ने नोटिस वापस लेने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इसे गलत बताया है। उनका कहना है कि कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला विभागीय बैठक में सहमति से लिया गया था और उसी आधार पर नोटिस जारी हुए थे। ऐसे में सचिव का एकतरफा नोटिस वापस लेने का निर्णय उचित नहीं है।

शराबबंदी के बीच तस्करी पर कौन तय करेगा जवाबदेही?

बिहार में 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद राज्य में अवैध शराब की बरामदगी और तस्करी के मामले लगातार चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दूसरे राज्यों से बिहार पहुंचने वाली शराब की खेप के मामले में निर्माता कंपनियों की जवाबदेही किस आधार पर तय होगी? एक तरफ कंपनियों का संगठन तस्करी में अपनी भूमिका से इनकार कर रहा है, तो दूसरी तरफ विभागीय मंत्री कार्रवाई के फैसले से पीछे हटने पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल 10 कंपनियों को जारी नोटिस वापस लेने के निर्देश के बाद यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शराब तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई की अगली रणनीति क्या होगी और विभाग के भीतर उठे मतभेदों का समाधान कैसे निकलेगा।