Bihar MLC Election: MLC चुनाव में महागठबंधन की कलह हुई बेपर्दा, 6 सीटों पर सहयोगी भिड़े,RJD-कांग्रेस की जंग फ्रेंडली फाइट या सियासी घमासान? पढ़िए
Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद के आगामी चुनाव सूबे की सियासत में एक नया भूचाल लेकर आए हैं। इन चुनावों में विपक्षी महागठबंधन के भीतर चल रही अंतर्कलह अब पूरी तरह बेनकाब हो गई है।
Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद के आगामी चुनाव सूबे की सियासत में एक नया भूचाल लेकर आए हैं। इन चुनावों में विपक्षी महागठबंधन के भीतर चल रही अंतर्कलह अब पूरी तरह बेनकाब हो गई है। इसे महज फ्रेंडली फाइट कहना गलत होगा, क्योंकि राजद और कांग्रेस के बीच मची यह रार सीधे तौर पर सियासी महासंग्राम का रूप ले चुकी है। राष्ट्रीय जनता दल द्वारा सहयोगी दलों से किसी प्रकार का विचार-विमर्श किए बिना 8 में से 6 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान करने के बाद, कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए 5 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। राहुल गांधी के इस कड़े फैसले ने साफ कर दिया है कि अब बिहार में आरजेडी की एकतरफा मनमानी नहीं चलेगी।
आठ में से छह सीटों पर महागठबंधन के घटक दल एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लेकर पटना स्नातक सीट तक, हर तरफ टकराव की स्थिति है। सारण सीट पर सीपीआई और राजद के बीच सीधी जंग छिड़ गई है, जहां सीपीआई के विद्यासागर विद्यार्थी और राजद के प्रो. जयराम यादव आमने-सामने हैं। इसी तरह, कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों पर भी राजद और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारकर चुनावी समर को त्रिकोणीय और रोचक बना दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर, जहां गठबंधन धर्म का पालन करते हुए सीपीआई के मौजूदा एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह को मैदान में उतारा गया है, बाकी जगहों पर सहयोगियों की तनातनी साफ दिख रही है। तिरहुत में टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष राजेश राठौर ने निर्दलीय ही हुंकार भर दी है, जिससे कांग्रेस के भीतर अनुशासनहीनता और अंदरूनी सियासत पर भी सवाल उठने लगे हैं।
दरभंगा स्नातक सीट पर आरजेडी ने अनिल कुमार झा को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने रजनीकांत पाठक को टिकट दिया है।सारण शिक्षक सीट पर सीपीआई ने इसलिए पहले ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी थी कि महागठबंधन की कोई पार्टी प्रत्याशी नहीं दे, लेकिन आरजेडी नहीं मानी।इस सीट पर सीपीआई से केदार पांडेय, जयमंगल सिंह जैसे नेता चुनाव लड़ते रहे थे।
सीपीएम ने दरभंगा शिक्षक सीट पर रामदेव राय को उतारा है।इस सीट पर सीटिंग एमएलसी कांग्रेस नेताडॉ. मदन मोहन झा हैं। कांग्रेस ने इन्हें फिर से टिकट दिया है
यह कोई पहला मौका नहीं है जब विपक्षी खेमे में इस तरह की फूट देखने को मिली हो। साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन को इसी आपसी समन्वय की कमी और कलह के कारण भारी खामियाजा भुगतना पड़ा था। तब भी कई सीटों पर मुख्य मुकाबला एनडीए से न होकर आपस में ही था। इसके अलावा, मार्च 2026 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी भीतरघात और वोटिंग के दौरान विधायकों की दूरियों ने इस बात पर मुहर लगा दी थी कि विपक्षी खेमे में तालमेल का भारी अभाव है।
आगामी एमएलसी चुनाव के बहाने यह साफ हो गया है कि विपक्षी गठबंधन वैचारिक एकता के मोर्चे पर लगातार कमजोर साबित हो रहा है। यदि समय रहते इन दलों ने आपसी अहं और महत्वाकांक्षाओं को दरकिनार कर रणनीतिक समन्वय नहीं बैठाया, तो इसका सीधा और पूरा फायदा एनडीए को मिलना तय है। देखना यह होगा कि चुनावी वैतरणी पार करने के लिए यह दल आपसी रार को थाम पाते हैं या फिर यह अंतर्कलह उनकी राजनीतिक नैया डुबोने के लिए काफी साबित होती है।