Bihar Education: बिहार के मॉडल स्कूलों में पढ़ाई के साथ बनेगा इन्फ्लुएंसर! डॉक्टर-इंजीनियर बनने की तैयारी कर रहे बच्चे, अब ब्लॉगिंग से दिखा रहे स्कूलों का दम

Bihar Education: बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की कोशिश अब डिजिटल दुनिया तक पहुंच रही है।....

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शिक्षा का नया प्रयोग- फोटो : reporter

Bihar Education: बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की कोशिश अब डिजिटल दुनिया तक पहुंच रही है। सहरसा जिले के मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं एक तरफ जेईई और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कंटेंट क्रिएशन, वीडियो ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिभा दिखाने के गुर भी सीख रहे हैं। सरस्वती विद्यालय निकेतन समेत जिले के मॉडल स्कूलों के विद्यार्थी अपने वीडियो के जरिए स्कूलों में उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं और पढ़ाई के तौर-तरीकों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

इस पहल की खास बात यह है कि विद्यार्थी केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने स्कूल की गतिविधियों को कैमरे में कैद कर उन्हें दिलचस्प अंदाज में पेश कर रहे हैं। इससे उनकी संवाद क्षमता, रचनात्मकता, टीमवर्क और डिजिटल कौशल को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मैथ्स और कंप्यूटर लैब से लेकर बायोलॉजी तक की पढ़ाई का वीडियो

मॉडल स्कूलों के विद्यार्थियों ने अपने वीडियो कंटेंट में गणित, कंप्यूटर और बायोलॉजी लैब में होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों को दिखाया है। वीडियो के जरिए वे यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रयोगशालाओं में पढ़ाई किस तरह विषयों को गहराई से समझने में मदद करती है।छात्रों ने टीम बनाकर शिक्षकों की पढ़ाने की शैली, पाठ्यक्रम और स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं को भी दर्शकों के सामने रखा। पीसीएम यानी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से जुड़ी पढ़ाई तथा प्रायोगिक शिक्षा को वीडियो के माध्यम से समझाया जा रहा है। इससे दूसरे विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिल सकती है।

पढ़ाई के साथ संगीत और कला-संस्कृति पर भी जोर

मॉडल स्कूलों में शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित रखने के बजाय कला-संस्कृति जैसी गतिविधियों को भी महत्व देने की बात सामने आई है। विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में संगीत सीखने और अपनी रुचि को निखारने का अवसर दिया जा रहा है।वीडियो ब्लॉगिंग के जरिए छात्र इन गतिविधियों को भी लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इससे यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मतलब केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी दूसरे कौशलों को विकसित करना भी है।

‘एक अफसर, एक विद्यालय’ पहल से मॉडल स्कूलों में बदलाव

सहरसा जिला मॉडल स्कूल और पतरघट स्थित रमा देवी हाई स्कूल के विद्यार्थियों ने वीडियो ब्लॉगिंग के जरिए स्कूलों की गतिविधियों को प्रस्तुत किया है। इनमें बिंदेश कुमार, खुशी कुमारी और जाह्नवी कुमारी जैसे विद्यार्थियों के नाम शामिल हैं। उनके तैयार किए गए वीडियो में सूचना के साथ मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया है।इन वीडियो की एक खासियत यह भी है कि विद्यासाथी ऐप के माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के अनुभव और प्रतिक्रियाएं भी शामिल की गई हैं। इससे स्कूलों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों और डिजिटल माध्यम से पढ़ाई के अनुभव को सामने लाने की कोशिश की गई है।

ग्रामीण बच्चों को डिजिटल मंच पर पहचान दिलाने की पहल

वरीय उप समाहर्ता सिमरन कुमारी ने बताया कि बिहार सरकार के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत ‘उन्नत विकास, उन्नत शिक्षा’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अंतर्गत अधिकारियों को विद्यालयों को गोद लेकर वहां उपलब्ध सुविधाओं और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है। स्कूलों में नियमित यूनिट टेस्ट और अभिभावकों के साथ संवाद आयोजित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि बच्चों की पढ़ाई की प्रगति का आकलन हो सके और जरूरत के मुताबिक सुधार किया जा सके।

अब गांव के बच्चे भी दुनिया के सामने दिखाएंगे अपनी प्रतिभा

मॉडल स्कूलों में वीडियो ब्लॉगिंग की यह पहल विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकती है। डिजिटल कंटेंट तैयार करने से बच्चों को तकनीक का रचनात्मक इस्तेमाल, प्रस्तुति कौशल और सामूहिक रूप से काम करने का अनुभव मिलता है।सहरसा के इन विद्यार्थियों की कोशिश यह भी दिखाती है कि ग्रामीण इलाकों की प्रतिभाओं को सही मार्गदर्शन और मंच मिले, तो वे अपनी उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर पहुंचा सकते हैं। अब देखना होगा कि यह पहल जिले के दूसरे विद्यालयों तक किस तरह पहुंचती है और कितने विद्यार्थी इससे प्रेरित होकर शिक्षा के साथ डिजिटल कौशल में भी आगे बढ़ते हैं।

हीरेश कुमार