Bihar Land: बिहार में ज़मीन विवादों का नया मॉडल , नीतीश ने पुलिस की ताक़त पर खींची लक्ष्मण रेखा, 1 फरवरी से लागू होंगे नए नियम

Bihar Land: बिहार की सियासत में एक अहम मोड़ पर नीतीश सरकार ने ज़मीन से जुड़े विवादों में पुलिस की भूमिका को सीमित कर बड़ा और दूरगामी संदेश दे दिया है।

Bihar Police Barred From Land Seizure as New Rules Begin Feb
बिहार में ज़मीन मामलों पर पुलिस की एंट्री बंद- फोटो : X

Bihar Land: बिहार की सियासत में एक अहम मोड़ पर नीतीश सरकार ने ज़मीन से जुड़े विवादों में पुलिस की भूमिका को सीमित कर बड़ा और दूरगामी संदेश दे दिया है। अब थानों की चौखट से ज़मीन का फ़ैसला नहीं होगा, बल्कि क़ानून, राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया ही आख़िरी हुक़्मरान होगी। 1 फ़रवरी से पूरे राज्य में लागू होने वाले नए दिशा-निर्देशों के तहत पुलिस बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के न तो दख़ल-क़ब्ज़ा दिला सकेगी और न ही किसी तरह का निर्माण कार्य करा पाएगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के जन कल्याण संवाद के दौरान आए परिवादों के गहन विश्लेषण के बाद यह साफ़ हो गया कि कई मामलों में “क़ानून-व्यवस्था” की आड़ में पुलिसिया दख़ल ज़रूरत से ज़्यादा रहा। इसी पृष्ठभूमि में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी और प्रधान सचिव सीके अनिल द्वारा जारी संयुक्त पत्र ने व्यवस्था की लकीर खींच दी है। अब भूमि विवाद में पुलिस की भूमिका महज़ अमन-ओ-अमान क़ायम रखने तक सीमित रहेगी।

नए नियमों के मुताबिक़, किसी भी भूमि विवाद की सूचना मिलते ही संबंधित थाना प्रभारी को अंचलाधिकारी को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा। यह सूचना ई-मेल या आधिकारिक पोर्टल के ज़रिये भी भेजी जा सकेगी, ताकि पुलिस और राजस्व प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल कायम हो। साफ़ शब्दों में कहा जाए तो अब फ़ैसला फ़ाइल और फ़रमान से होगा, न कि वर्दी के रौब से।

डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दो टूक कहा है कि भूमि विवाद के नाम पर न तो थानों की मनमानी चलेगी और न ही पुलिसिया हस्तक्षेप की आड़ में किसी को डराया-धमकाया जाएगा। उनके मुताबिक़, ज़मीन का विवाद राजस्व और अदालत का मसला है, पुलिस की सनक का नहीं। यदि बिना सक्षम आदेश के कब्ज़ा दिलाने, चहारदीवारी या निर्माण कराने की शिकायत मिली, तो संबंधित अफ़सर पर सख़्त कार्रवाई तय है।

दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि थाना को स्टेशन डायरी में अलग और स्पष्ट प्रविष्टि करनी होगी, जिसमें दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद की प्रकृति, भूमि का पूरा विवरण और प्रारंभिक पुलिस कार्रवाई दर्ज होगी। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि मामला किस राजस्व न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। सियासी मायनों में यह फ़ैसला प्रशासनिक सुधार से ज़्यादा, सत्ता के संतुलन की कोशिश है जहाँ ज़मीन पर अब क़ानून की हुकूमत होगी, न कि बंदूक और डंडे की।