Bihar Cyber Crime: बिहार में अब साइबर अपराधियों की खैर नहीं ! आईजी जितेंद्र राणा ने बनाया मास्टर प्लान, होने जा रहा ये काम
Bihar Cyber Crime: बिहार में अब साइबर अपराधियों की खैर नहीं होगी। बिहार पुलिस ने ऐसा प्लान बनाया है जिससे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आइए जानते हैं पूरी खबर क्या है...
Bihar Cyber Crime: बिहार सहित पूरे देश में साइबर अपराध के मामले बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराधी एक के बाद एक आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। वहीं अब इन साइबर ठगों पर नकेल कसने के लिए बिहार पुलिस ने तैयारी कर ली है। साइबर अपराधों पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। सेंट्रल रेंज के आईजी जितेंद्र राणा ने पटना में तीन नए साइबर थाने खोलने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। ये थाने सभी एसपी के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में खोले जाएंगे, ताकि आम लोगों को साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए दूर न जाना पड़े।
80 थानों में एक एक सब इंस्पेक्टर की तैनाती
आईजी ने आदेश दिया है कि पटना के सभी 80 थानों में एक-एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की तैनाती की जाए। ये एसआई साइबर थाने के जांच अधिकारियों (IO) को तकनीकी सहयोग देंगे और पीड़ितों व पुलिस के बीच कड़ी का काम करेंगे। साइबर थाने के चारों डीएसपी को अब हर महीने एक बड़े केस का खुलासा करने और कम से कम 5 लंबित मामलों की जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल साइबर थानों में करीब 5700 मामले लंबित हैं। स्थिति यह है कि एक-एक आईओ पर औसतन 500 केस हैं।
तकनीकी जानकारी की कमी बनी बड़ी चुनौती
साइबर थानों में तैनात कई इंस्पेक्टर और एसआई इंटरनेट व साइबर अपराध की तकनीकी जानकारी में कमजोर बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया से इनपुट लेने और डिजिटल ट्रैकिंग की जानकारी कम होने के कारण जांच की रफ्तार धीमी पड़ रही है। वहीं, अधिकतर मामलों में अपराध का नेटवर्क दो-तीन राज्यों से जुड़ा होता है आधार एक राज्य का, बैंक खाता दूसरे का और सिम किसी तीसरे राज्य का जिससे जांच और जटिल हो जाती है।
थानेवार लिस्ट और रोजाना मॉनिटरिंग
आईजी ने निर्देश दिया है कि साइबर मामलों की थानेवार सूची बनाई जाए, ताकि पीड़ित के नजदीकी थाने का एसआई जांच में प्रभावी सहयोग कर सके। सभी संबंधित एसपी को आदेश दिया गया है कि वे रोजाना साइबर मामलों की प्रगति की खुद निगरानी करें। इसके साथ ही डीएसपी को निर्देश दिया गया है कि वे जांच में स्थानीय एसडीपीओ, अंचल निरीक्षक और थानेदार की भी मदद लें। आईओ को टेलीकॉम कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और बैंक अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा गया है।