Bihar Law And Order: बिहार में कानून-व्यवस्था पर मैडम ने कस दिया शिकंजा, 40 जिलों की कमान इन 36 अफसरों के हाथ, निरीक्षण की डेडलाइन तय

Bihar Law And Order: बिहार में कानून-व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए एडीजी से लेकर डीआईजी स्तर के 36 पुलिस पदाधिकारियों को 40 पुलिस जिलों का प्रभारी और नोडल पदाधिकारी नामित किया है।...

Bihar Police Tightens Law and Order Grip Across 40 Districts

Bihar Law And Order: बिहार में कानून-व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए एडीजी से लेकर डीआईजी स्तर के 36 पुलिस पदाधिकारियों को 40 पुलिस जिलों का प्रभारी और नोडल पदाधिकारी नामित किया है। इस नयी व्यवस्था का मकसद जिलों में विधि-व्यवस्था की जमीनी हकीकत की नियमित निगरानी, लंबित मामलों की समीक्षा और पुलिसिंग की जवाबदेही को और मजबूत करना है। मुख्यालय ने अफसरों को महज कागजी समीक्षा तक सीमित रहने के बजाय आवंटित जिलों में पहुंचकर हालात का जायजा लेने का निर्देश दिया है।

नई व्यवस्था के तहत एडीजी (विधि व्यवस्था) केएस अनुपम को पटना का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है, जबकि एडीजी (बी-सैप) नैय्यर हसनैन खान को मुजफ्फरपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एडीजी आर मलार विझि को नालंदा, एडीजी ईओयू डॉ. अमित कुमार जैन को वैशाली और एडीजी एसवीयू सुधांशु कुमार को दरभंगा का प्रभारी बनाया गया है। चार वरिष्ठ अधिकारियों को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।

मुख्यालय ने सभी नामित पुलिस पदाधिकारियों को 27 सितंबर तक अपने-अपने आवंटित जिलों का निरीक्षण पूरा कर डीजीपी प्रीता वर्मा को रिपोर्ट सौंपने का फरमान जारी किया है। इससे साफ है कि मुख्यालय जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।

जारी सूची के मुताबिक एडीजी रेल डॉ. कमल किशोर सिंह को समस्तीपुर, एडीजी सीआईडी पारसनाथ को मुंगेर, एडीजी आधुनिकीकरण अजिताभ कुमार को गोपालगंज, एडीजी तकनीकी सेवाएं अमित लोढ़ा को लखीसराय और शेखपुरा, एडीजी एटीएस अमृत राज को भोजपुर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं आईजी (एससीआरबी) राजेश कुमार को पूर्णिया, आईजी (प्रोविजन) पी कन्नन को सारण, आईजी प्रशिक्षण अनुसूया रणसिंह साहू को औरंगाबाद और आईजी रेल पंकज कुमार राज को भागलपुर व नवगछिया का प्रभारी बनाया गया है।

इसके अलावा डीआईजी साइबर अवकाश कुमार को सीतामढ़ी, डीआईजी सीआईडी दीपक रंजन को बक्सर, डीआईजी इनामुल हक मेंगनू को जमुई और डीआईजी एसयूवी आमिर जावेद को सीवान का प्रभारी पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है। डीआईजी एससीआरबी सुधीर पोरिका को खगड़िया, डीआईजी आधुनिकीकरण तौहिद परवेज को किशनगंज, डीआईजी विधि एवं मानवाधिकार सुशील कुमार को शिवहर, डीआईजी मद्य निषेध अनिल कुमार को सहरसा, डीआईजी कार्मिक राजेंद्र कुमार भील को मधेपुरा और डीआईजी विधि व्यवस्था आनंद कुमार को मोतिहारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

इसी तरह आईजी मद्य निषेध प्रेमलथा को जहानाबाद, आईजी सीआईडी और सीसीएसयू रंजीत कुमार मिश्रा को मधुबनी, आईजी मुख्यालय मनोज कुमार को गया जी तथा आईजी विशेष शाखा संजय कुमार को बेतिया और बगहा की जिम्मेदारी मिली है। डीआईजी सीआईडी जयंत कांत को कटिहार, डीआईजी ईओयू मानवजीत सिंह ढिल्लन को रोहतास, डीआईजी विशेष शाखा हरप्रीत कौर को कैमूर और डीआईजी बी-सैप मीनू कुमारी को बेगूसराय का प्रभारी बनाया गया है।

वहीं डीआईजी प्रशिक्षण राजीव रंजन एक को बांका, डीआईजी ईआरएसएस अजय कुमार पांडेय को अरवल एवं नवादा, डीआईजी एसटीएफ नीरज कुमार सिंह को अररिया और डीआईजी एटीएस सुशांत कुमार सरोज को सुपौल की जिम्मेदारी दी गई है।

इन अधिकारियों को अपने आवंटित जिलों में जाकर सिर्फ अपराध की संख्या नहीं, बल्कि पुलिसिंग के पूरे सिस्टम की नब्ज टटोलनी होगी। समीक्षा में कानून-व्यवस्था, लंबित कांडों, अनुसंधान और उसके निष्पादन, मुकदमों के ट्रायल, थानों की कार्यप्रणाली, गश्ती व्यवस्था, महिला अपराध, पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न कानूनों के क्रियान्वयन को शामिल किया गया है। अधिकारियों को तय अंतराल पर जिलों में बैठक कर स्थिति की समीक्षा करनी होगी और उसकी रिपोर्ट डीजीपी को भेजनी होगी।

इधर, पुलिस मुख्यालय के विधि व्यवस्था प्रभाग ने क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी को भी अपने-अपने क्षेत्र के जिलों में विधि-व्यवस्था से जुड़े मामलों की गहन समीक्षा का निर्देश दिया है। क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी को 25 से 28 सितंबर तक संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम कर लंबित कांडों, वारंट, इश्तिहार, कुर्की और गश्ती व्यवस्था समेत अहम बिंदुओं की पड़ताल करनी होगी। इसके बाद 29 सितंबर तक पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट सौंपनी होगी।

यानी आने वाले दिनों में जिलों की पुलिसिंग पर दोहरे स्तर से निगरानी होगी। एक तरफ नामित एडीजी-डीआईजी जमीनी हालात का जायजा लेंगे, वहीं क्षेत्रीय आईजी-डीआईजी भी रात में जिले में रुककर पुलिस व्यवस्था की परतें खोलेंगे। लंबित कांडों से लेकर वारंट और गश्ती तक हर मोर्चे की रिपोर्ट मुख्यालय तक पहुंचेगी। इस कवायद से थानों की कार्यप्रणाली, अनुसंधान की रफ्तार और कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर आला अधिकारियों की सीधी नजर रहेगी।