Bihar Politics:बिहार की सियासत में घमासान, महागठबंधन में बगावत, 18 विधायक एनडीए में आने को तैयार! सियासी बिसात पर कौन किसको देगा मात?

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में 202 सीटों की धमाकेदार फ़तह के बाद एनडीए की सत्ता में तो वापसी हो गई, मगर सूबे की सियासत अभी भी तूफ़ानी मोड में है।

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महागठबंधन में बगावत, 18 विधायक एनडीए में आने को तैयार! - फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में 202 सीटों की धमाकेदार फ़तह के बाद एनडीए की सत्ता में तो वापसी हो गई, मगर सूबे की सियासत अभी भी तूफ़ानी मोड में है। हर दिन नए दाँव, नए बयान, और नई हलचल… मानो पटना की हवा में भी राजनीति की तपिश घुल गई हो।

सबसे पहले भाजपा नेता और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने एक ऐसा बयान दे मारा जिसने महागठबंधन की दीवारों में हल्की-हल्की दरारें दिखा दीं। पांडेय का दावा है कि लालू यादव के ख़ानदान में जो बग़ावत हुई, उसने आने वाले तूफ़ान का संकेत दे दिया है। पार्टी के अंदर का असंतोष अब दबने वाला नहीं। जल्दी ही बाहर सबके सामने आ जाएगा। पांडेय की यह चुभती हुई टिप्‍पणी सिर्फ बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक तीर थी जो सीधे राजद की अंदरूनी राजनीति पर निशाना लगी।

इधर, लालू यादव के क़रीबी रहे शिवानंद तिवारी ने भी सोशल मीडिया पर तेजस्वी यादव को शादी की सालगिरह की शुभकामनाएँ देते-देते उनके नेतृत्व पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए। तिवारी की बातों में तल्ख़ी साफ झलक रही थी हार के बाद तेजस्वी ने मैदान छोड़ दिया। यह टिप्पणी राजद खेमे के अंदर चल रही बेचैनी का इशारा करती है।

उधर, जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने तो सीधे दावा कर दिया कि महागठबंधन के 17-18 विधायक उनकी पार्टी से संपर्क में हैं। उनका कहना कि ये सब लोग खुद पहल कर रहे हैं, बस समय का इंतज़ार करें। नीरज कुमार का यह बयान विपक्ष के कैंप में और अधिक खलबली मचा गया। वह आरोप लगा रहे हैं कि विपक्षी खेमे में आंतरिक भूचाल अपने चरम पर है।

लेकिन कहानी इस मोड़ पर और दिलचस्प हो जाती है जब राजद के प्रवक्ता चितरंजन गगन मैदान में उतरते हैं और पूरे दावे को मनगढ़ंत, झूठा और सियासी नौटंकी करार देते हैं। गगन का आरोप है कि जदयू और भाजपा अपनी ही आपसी खींचतान को छिपाने के लिए महागठबंधन पर टूट की अफ़वाहें फैला रहे हैं। उनका यह भी कहना कि महागठबंधन के विधायक नफ़रत नहीं, मुद्दों रोजगार, पलायन, महँगाई के आधार पर चुने गए हैं, उन्हें खरीद-फरोख्त से नहीं तोड़ा जा सकता।

महागठबंधन की ओर से साफ संदेश है कि हमारी पंक्ति मज़बूत है, टूट की कोई गुंजाइश नहीं। जदयू का दावा सिर्फ सियासी धुँआ-पट्टी है।कुल मिलाकर, बिहार की सियासत में इस वक़्त आर-पार की जंग छिड़ी हुई है बयान एक-दूसरे पर तीर की तरह चल रहे हैं, और जनता तमाशा देख रही है कि आने वाले दिनों में असली भूचाल किस ओर से उठता है!