बिहार में शराबबंदी होगी खत्म! NDA के विधायक ने सीएम नीतीश के सामने कर दी बड़ी मांग

बिहार की राजनीति में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले एनडीए गठबंधन के साथी ने ही उनके 'विशिष्ट' शराबबंदी कानून को कटघरे में खड़ा कर दिया। रा

बिहार में शराबबंदी होगी खत्म! NDA के विधायक ने सीएम नीतीश के

Patna - बिहार विधानसभा के गलियारों में एक बार फिर शराबबंदी कानून को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के महत्वपूर्ण सहयोगी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता माधव आनंद ने सदन में शराबबंदी कानून की व्यापक समीक्षा करने की मांग उठाई है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति में यह मुद्दा रखा, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। 

"वक्त आ गया है समीक्षा का" — माधव आनंद

माधव आनंद ने सदन के भीतर और बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए जोर देकर कहा कि बिहार में शराबबंदी को लागू हुए लगभग एक दशक होने जा रहा है। उन्होंने कहा, "समय आ गया है कि इस कानून की गहराई से समीक्षा की जाए।" आनंद का तर्क है कि किसी भी बड़े नीतिगत फैसले की एक निश्चित समय के बाद पड़ताल जरूरी होती है ताकि उसके धरातल पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों का आकलन किया जा सके। 

राजस्व और आर्थिक पहलुओं पर चिंता

विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी के कारण राज्य के राजस्व को होने वाले नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक अर्थशास्त्री के दृष्टिकोण से बात करते हुए कहा कि बिहार जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए राजस्व का एक बड़ा हिस्सा शराबबंदी के कारण बंद हो गया है। समीक्षा के माध्यम से यह देखा जाना चाहिए कि क्या इस कानून के मूल उद्देश्यों को प्राप्त किया गया है या फिर इससे केवल सरकारी खजाने पर ही बोझ बढ़ा है। 

कानूनी जटिलताएं और गरीबों पर असर

सदन में चर्चा के दौरान शराबबंदी से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी जिक्र हुआ। अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि शराबबंदी कानून की आड़ में गरीबों और वंचित वर्गों के लोगों को पुलिसिया प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। माधव आनंद ने संकेत दिया कि कानून के कड़े प्रावधानों में समय-समय पर संशोधन हुए हैं, लेकिन अब एक विस्तृत आकलन की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसका दुरुपयोग न हो और निर्दोष लोग न फंसें। 

नीतीश कुमार की मौजूदगी में उठा मुद्दा

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यह मांग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में की गई, जो इस कानून को अपनी सबसे बड़ी सामाजिक उपलब्धि मानते हैं। माधव आनंद ने मुख्यमंत्री को 'विकास पुरुष' बताते हुए उनके द्वारा लिए गए साहसिक निर्णयों की प्रशंसा तो की, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि एक परिपक्व नेतृत्व हमेशा सुधारों के लिए तैयार रहता है। अब देखना यह है कि सरकार इस मांग को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या आने वाले समय में शराबबंदी नीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।