Bihar Police:बिहार में सम्राट चौधरी की अग्निपरीक्षा शुरू, मुफ्त योजनाओं और कर्ज के दबाव में फंसी सरकार, अर्थव्यवस्था और कानून व्यवस्था बनी परीक्षा

Bihar Police:बिहार की सियासत में भले ही भाजपा के नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभालकर एक नया अध्याय शुरू किया हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है।

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:बिहार में सम्राट चौधरी की अग्निपरीक्षा शुरू- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Police:बिहार की सियासत में भले ही भाजपा के नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभालकर एक नया अध्याय शुरू किया हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। राज्य की अर्थव्यवस्था से लेकर कानून-व्यवस्था तक, हर मोर्चे पर हालात ऐसे हैं कि डबल इंजन सरकार की ताकत भी अब अग्नि परीक्षा से गुजरती दिख रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार का बजट 24–25 हजार करोड़ से बढ़कर लगभग 3 लाख 47 हजार करोड़ रुपये तक पहुँच गया, लेकिन इसके साथ-साथ लोकलुभावन योजनाओं और चुनावी वादों ने राजकोष पर भारी दबाव भी डाल दिया है। 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना पर लगभग 19 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं। वहीं डेढ़ करोड़ से अधिक महिलाओं को दी गई 10-10 हजार रुपये की सहायता योजना ने भी 15 हजार करोड़ से अधिक का भार सरकार पर डाल दिया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सब्सिडी और अन्य वादों को जोड़ दें तो कुल बोझ 40 हजार करोड़ रुपये से भी ऊपर पहुँच चुका है और आने वाले समय में यह और बढ़ने की आशंका है।

इसी बीच राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। हत्या, बलात्कार और संगठित अपराध की घटनाएँ लगातार सुर्खियों में हैं। हालांकि नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए सख्त तेवर दिखाए हैं। वे खुले मंच से कह चुके हैं या तो अपराधी बिहार छोड़ दें या जेल जाने के लिए तैयार रहें। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार अब तक नजर नहीं आया है।

24 दिसंबर 2025 को दिए गए उनके बयान कचरा साफ करूंगा, अपराधियों को तीन महीने में भगा दूंगा ने राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा बटोरी, लेकिन विपक्ष इसे केवल बयानबाज़ी बता रहा है।इधर सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जो 400 से बढ़ाकर 1100 की गई थी, उसका भुगतान भी कई महीनों से प्रभावित बताया जा रहा है। इससे आम जनता में नाराज़गी बढ़ रही है। 

अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ डॉ. रामानंद पाण्डेय का मानना है कि बिहार सरकार का राजस्व मॉडल अब दबाव में है। वेतन, पेंशन, सब्सिडी और ऋण भुगतान में बड़ी राशि जा रही है। ऐसे में राज्य को या तो राजस्व बढ़ाना होगा या फिर केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता लेनी होगी।

हालांकि डबल इंजन सरकार होने के कारण केंद्र से सहयोग की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन सवाल यही है कि क्या सम्राट चौधरी इन भारी वादों और वित्तीय दबावों के बीच संतुलन बनाकर विकास और सुशासन का वादा पूरा कर पाएंगे? 

बिहार की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ हर फैसला आने वाले वर्षों की दिशा तय करेगा और सम्राट चौधरी की असली परीक्षा यहीं से शुरू होती है।