राज्यसभा चुनाव: आरजेडी विधायक की मांग—हिना शहाब को बनाया जाए उम्मीदवार, ओवैसी फैक्टर पर टिकी नजरें

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गई है। आरजेडी के कद्दावर नेता और विधायक भाई वीरेंद्र ने पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को राज्यसभा भेजने की वकालत कर सबको चौंका दिया है।

राज्यसभा चुनाव: आरजेडी विधायक की मांग—हिना शहाब को बनाया जाए

Patna - : बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। आरजेडी के कद्दावर विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी नेतृत्व से पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को उम्मीदवार बनाने की वकालत की है। उनका मानना है कि हिना शहाब के नाम पर विपक्षी एकता को मजबूती मिलेगी और ओवैसी की पार्टी का समर्थन भी हासिल किया जा सकेगा।

भाई वीरेंद्र की मांग और 'एक तीर से कई शिकार'

आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने सोमवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए हिना शहाब को महागठबंधन का साझा उम्मीदवार बनाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि हिना को चुनाव लड़ाने से कई सियासी समीकरण सध जाएंगे। वीरेंद्र का मानना है कि इस नाम पर एआईएमआईएम (AIMIM) के 5 विधायकों का समर्थन आरजेडी को मिल सकता है, जिसके बिना एक सीट जीतना फिलहाल मुश्किल दिख रहा है।

क्रॉस वोटिंग और सत्ता पक्ष में सेंधमारी का दावा

भाई वीरेंद्र ने केवल विपक्षी एकजुटता की ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने यह बड़ा दावा भी किया कि यदि हिना शहाब मैदान में आती हैं, तो सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के कुछ विधायक भी महागठबंधन के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाई वीरेंद्र का यह बयान पार्टी नेतृत्व की उस मंशा को समझने का जरिया हो सकता है, जिसके तहत हिना को उतारने पर होने वाली प्रतिक्रिया का आकलन किया जा सके।\

ओवैसी की पार्टी का 'राज्यसभा' दांव

दूसरी ओर, एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट की है। उन्होंने पिछले दिनों प्रस्ताव दिया था कि क्यों न एआईएमआईएम का कोई नेता राज्यसभा चुनाव लड़े और राजद समेत पूरा विपक्ष उसे समर्थन दे। वहीं, महागठबंधन की सहयोगी पार्टी आईआईपी (IIP) के विधायक आईपी गुप्ता ने भी हाल ही में हैदराबाद में ओवैसी से मुलाकात की है, जिससे राज्यसभा चुनाव में ओवैसी फैक्टर की भूमिका काफी अहम हो गई है।

 राज्यसभा सीटों का गणित और खाली होते कार्यकाल

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें जेडीयू के हरिवंश व रामनाथ ठाकुर, आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा, और राजद के प्रेमचंद गुप्ता व एडी सिंह का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को मतदान की तिथि तय की है। 243 सदस्यों वाली विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।

महागठबंधन के पास संख्या बल की चुनौती

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिससे उनके 4 उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है। हालांकि, 5वीं सीट के लिए उनके पास 3 वोटों की कमी है। वहीं, आरजेडी और महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, यानी एक सीट जीतने के लिए उन्हें 6 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। ऐसे में बसपा का 1 और ओवैसी की पार्टी के 5 विधायकों का रुख तेजस्वी यादव के लिए निर्णायक साबित होगा।R