Bihar teacher: छात्र को क्लास में डकार लेना पड़ा महंगा! मास्टर साहब हुए गुस्से से लाल कर दी सुताई, जानें पूरा मामला
Bihar teacher: पश्चिम चंपारण के बेतिया में ओझवलिया उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों की पिटाई के मामले में शिक्षा विभाग सख्त, दो शिक्षकों से स्पष्टीकरण तलब।
Bihar teacher: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से सामने आया यह मामला शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और शिक्षक-छात्र संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बेतिया के बैरिया प्रखंड अंतर्गत उच्च माध्यमिक विद्यालय ओझवलिया में कक्षा-9 के दो छात्रों के साथ कथित रूप से की गई बेरहमी से मारपीट के बाद शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया है, बल्कि राज्य में विद्यालयों के भीतर अनुशासन और आचरण को लेकर बहस भी छेड़ दी है।
शिकायत मिलने के बाद डीपीओ समग्र शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा-साक्षरता गार्गी कुमारी ने आरोपित दो शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि शिक्षा विभाग अब ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
डकार ली तो पीट डाला,छात्रों की शिकायत से खुला पूरा मामला
डीपीओ द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पटखौली परती टोला, बैरिया निवासी मो. सैयद हुसैन ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को इस संबंध में लिखित शिकायत सौंपी थी। शिकायत में बताया गया कि कक्षा के दौरान डकार लेने की बात को लेकर शिक्षक सुनील कुमार पाल और संदीप कुमार राय ने कक्षा-9 के दो छात्रों को जबरन कक्षा से बाहर निकाल दिया।
आरोप है कि दोनों छात्रों को टाइल्स लगी जमीन पर पटक दिया गया और फिर बेरहमी से उनकी पिटाई की गई। छात्रों के अनुसार, उन्होंने बार-बार हाथ जोड़कर मारपीट न करने की गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद शिक्षक नहीं रुके।
मूकदर्शक बने शिक्षक और निष्कासन की पैरवी का आरोप
पीड़ित छात्रों का यह भी आरोप है कि घटना के समय विद्यालय में अन्य शिक्षक मौजूद थे, लेकिन दबंगई के चलते कोई भी आगे आकर उन्हें बचाने का साहस नहीं कर सका। यह पहलू विद्यालय के आंतरिक माहौल पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि शिक्षक ही एक-दूसरे के गलत आचरण पर चुप्पी साध लें, तो छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? इतना ही नहीं, छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के बाद आरोपित शिक्षकों ने प्रधानाध्यापक से उन्हें विद्यालय से निष्कासित करने की पैरवी की। यह कदम पीड़ितों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डालने जैसा माना जा रहा है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बच्चों की गलती थी भी, तो उसका समाधान संवाद और अनुशासनात्मक प्रक्रिया से किया जाना चाहिए था, न कि हिंसा से।
शिक्षा विभाग की सख्ती: आचरण संहिता और RTE का उल्लंघन
एक अखबार के अनुसार, डीपीओ गार्गी कुमारी ने इस पूरे प्रकरण को अध्यापक आचरण संहिता और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को खराब करती हैं और छात्रहित के पूरी तरह प्रतिकूल हैं। डीपीओ ने दोनों शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे आरोपों के प्रत्येक बिंदु पर साक्ष्य सहित अपना पक्ष तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।