बिहार में स्मार्ट मीटर बना बदलाव की मिसाल, 5 साल में दोगुनी हुई बिजली कंपनियों की आय
राज्य की दोनों सरकारी बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले सात महीनों में 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए हैं। इसके साथ ही 1 जुलाई 2026 तक बिहार में कुल स्मार्ट मीटरों की संख्या 92 लाख के करीब पहुंच गई है
Bihar Smart Meter : बिहार में स्मार्ट बिजली मीटर परियोजना अब पूरे देश के लिए एक मॉडल बनकर उभर रही है। करीब 16,900 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना ने न केवल राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार किया है, बल्कि बिजली चोरी, वितरण हानि और बकाया घाटे को भी उल्लेखनीय रूप से कम किया है। बिहार की इस सफलता के बाद अन्य राज्यों के भी स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज करने की संभावना जताई जा रही है। इससे Genus Power Infrastructure, HPL Electric & Power, Adani Energy Solutions, GMR Power & Urban Infra और Shivalik Bimetal Controls जैसी कंपनियों को भी बड़ा कारोबारी अवसर मिल सकता है।
राज्य की दोनों सरकारी बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले सात महीनों में 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए हैं। इसके साथ ही 1 जुलाई 2026 तक बिहार में कुल स्मार्ट मीटरों की संख्या 92 लाख के करीब पहुंच गई है, जबकि नवंबर 2025 के मध्य तक यह संख्या 87 लाख थी। वर्ष 2025 के अंत तक देश में लगाए गए हर छह स्मार्ट मीटरों में से एक बिहार में था और राज्य के 53.6 प्रतिशत उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से जुड़ चुके थे।
बिहार के ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने कहा कि बिजली वितरण में तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान लंबे समय से बड़ी चुनौती रहे हैं और स्मार्ट मीटर इस समस्या का प्रभावी समाधान साबित हुए हैं। बिहार ने वर्ष 2019 में ही स्मार्ट मीटर नीति लागू कर इस दिशा में शुरुआती कदम उठा लिया था।
बिजली कंपनियों की आय में उछाल
स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद राज्य की बिजली कंपनियों की आय में भी बड़ा उछाल आया है। दोनों डिस्कॉम का संयुक्त राजस्व पांच वर्षों में लगभग दोगुना होकर 10,099 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,036 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं मार्च 2023 में 19,800 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका संचयी घाटा मार्च 2025 तक घटकर 16,500 करोड़ रुपये रह गया। इक्विरस कैपिटल के प्रबंध निदेशक विजय अग्रवाल के अनुसार स्मार्ट मीटर की वजह से बिहार के डिस्कॉम अब स्वतंत्र बिजली उत्पादकों को समय पर भुगतान कर रहे हैं और कैश डिस्काउंट का भी लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिजली वितरण हानि लगभग 35 प्रतिशत से घटकर 14 प्रतिशत रह गई है, जिससे कंपनियों को बड़ी वित्तीय बचत हुई है।
बिजली चोरी पर भी प्रभावी अंकुश
बिलिंग और वसूली व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। SBPDCL की बिलिंग दक्षता 73.81 प्रतिशत से बढ़कर 84.61 प्रतिशत और NBPDCL की 80.71 प्रतिशत से बढ़कर 91.09 प्रतिशत हो गई। वहीं संग्रहण दक्षता SBPDCL में 85.33 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत और NBPDCL में 94.01 प्रतिशत से बढ़कर 96.12 प्रतिशत पहुंच गई। बिजली चोरी और अवैध उपयोग पर भी प्रभावी अंकुश लगा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों कंपनियों ने ऐसे 50,208 मामले पकड़े और 92.05 करोड़ रुपये की वसूली की। इसमें SBPDCL ने 40.32 करोड़ रुपये तथा NBPDCL ने 51.73 करोड़ रुपये की रिकवरी की।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत वर्ष 2028 तक देशभर में 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसका विरोध देखने को मिला है, लेकिन बिहार का अनुभव यह दिखाता है कि स्मार्ट मीटर न केवल बिजली चोरी रोकने बल्कि डिस्कॉम की वित्तीय सेहत सुधारने और सरकारी खजाने पर बोझ कम करने का भी प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।