बिहार सुगर कॉपरेशन के 6 अधिकारियों को जेल और जुर्माना, चीनी मिल घोटाले में 35 साल बाद न्याय, निगरानी ब्यूरो की बड़ी सफलता

चीनी मिल गबन मामले में माननीय न्यायालय ने बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड के 6 तत्कालीन अधिकारियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है । इन पदाधिकारियों पर 1990 में पद का दुरुपयोग कर 997 बोरे चीनी के गबन और जालसाजी का आरोप था

बिहार सुगर कॉपरेशन के 6 अधिकारियों को जेल और जुर्माना, चीनी

Patna - बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी अभियान में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को बड़ी सफलता मिली है । निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज एक पुराने मामले में माननीय न्यायालय ने बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड के 6 सरकारी पदाधिकारियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है । यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और जालसाजी की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है, जिसमें तत्कालीन प्रशासन प्रमुख से लेकर लेखा पदाधिकारी तक शामिल हैं ।

यह मामला मुख्य रूप से पश्चिम चम्पारण के बेतिया स्थित लौरिया चीनी मिल से जुड़ा है । सितंबर 1990 में पद का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी और जालसाजी के जरिए 997 बोरे चीनी के गबन का आरोप दर्ज किया गया था । इस भ्रष्टाचार की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई और समय पर सटीक आरोप-पत्र दाखिल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप वर्षों बाद अब न्याय हुआ है ।

मुजफ्फरपुर स्थित निगरानी न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री दशरथ मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराया । कोर्ट ने तत्कालीन प्रशासन प्रमुख नंद किशोर सिंह और प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक उमेश प्रसाद सिंह को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है । साथ ही इन दोनों अधिकारियों पर 10,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा ।

वहीं, लौरिया इकाई के तत्कालीन लिपिक लालबाबू प्रसाद, सुशील कुमार श्रीवास्तव, लेखा पदाधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव और चीनी बिक्री प्रभारी धीरेन्द्र झा को और भी कड़ी सजा मिली है । इन चारों पदाधिकारियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है । इस मामले में बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्री कृष्णदेव साह ने प्रभावी ढंग से पैरवी की ।

निगरानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक कुल 30 भ्रष्टाचार के मामलों में माननीय न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है । ब्यूरो ने जनता से अपील की है कि यदि कोई सरकारी सेवक रिश्वत की मांग करता है, तो विभाग द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों (जैसे 0612-2215344) पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं ।