हादसों को रोकने के लिए शिक्षा विभाग की मदद लेगा परिवहन विभाग, नियमों की अनदेखी करने वालों की अब खैर नहीं, मददगारों को मिलेगा 25 हजार का इनाम

9वीं से 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं. अब तक 25 संस्थानों के 10 हजार से अधिक छात्रों को प्रत्यक्ष रूप से प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50 हजार युवाओं तक यह संदेश पहुँचाया गया है

हादसों  को रोकने के लिए  शिक्षा विभाग  की मदद लेगा परिवहन वि

Patna - बिहार में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए परिवहन विभाग ने जमीनी स्तर पर मोर्चा खोल दिया है. जनवरी माह में पूरे प्रदेश में सुरक्षित ड्राइविंग और यातायात नियमों को लेकर सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इस मुहिम के तहत चालकों को न केवल यातायात संकेतों की रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जा रही है, बल्कि जिलों में 'जागरूकता रथ' और चालकों की 'नि:शुल्क नेत्र जांच' जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी किए जा रहे हैं. 

मिशन रोड सेफ्टी: युवाओं को बनाया जा रहा है सुरक्षा दूत

पटना जिला परिवहन पदाधिकारी और 'मिशन रोड सेफ्टी' की संयुक्त पहल से शैक्षणिक संस्थानों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है. नवंबर 2025 से शुरू हुए इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं. अब तक 25 संस्थानों के 10 हजार से अधिक छात्रों को प्रत्यक्ष रूप से प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50 हजार युवाओं तक यह संदेश पहुँचाया गया है. विभाग का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक 100 संस्थानों को कवर करना है. 

हेल्मेट और सीटबेल्ट पर सख्ती: नियमों की अनदेखी पड़ेगी भारी

परिवहन विभाग सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों से अपील कर रहा है कि वे सुरक्षित यात्रा के लिए ISI मार्क वाले हेल्मेट और सीटबेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें. इसके साथ ही निर्धारित स्पीड लिमिट का पालन करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे सड़कों पर सक्रिय रहकर लोगों को जागरूक करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नज़र रखें. 

कुहासे और जुगाड़ गाड़ियों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'

ठंड के मौसम में बढ़ते कुहासे के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं. परिवहन मंत्री के निर्देशानुसार, राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्गों पर ई-रिक्शा के परिचालन को बंद करने और जुगाड़ गाड़ियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए गए हैं. यह निर्णय मुख्य सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने और यातायात को सुचारू बनाने के उद्देश्य से लिया गया है. 

'नेक मददगार' को इनाम: 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि

सड़क दुर्घटना में घायलों की जान बचाने के लिए विभाग ने एक बड़ी प्रोत्साहन योजना लागू की है. 'गोल्डन आवर' (दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा) में घायलों को अस्पताल पहुँचाने वाले राहगीरों को 25,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य लोगों को घायलों की मदद के लिए प्रेरित करना है ताकि समय पर इलाज मिलने से कीमती जानें बचाई जा सकें. 

शिक्षक और कर्मचारी भी ले रहे ट्रेनिंग

यह अभियान केवल छात्रों तक सीमित नहीं है. शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक, कर्मचारी, वाहन चालक और संवाहक (कंडक्टर) भी सुरक्षित ड्राइविंग और सुरक्षा मानकों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. विभाग का मानना है कि जब तक पूरा इकोसिस्टम प्रशिक्षित नहीं होगा, तब तक सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता.

रिपोर्ट - वंदना शर्मा