Bihar Truck Owners Association: ई-डिटेक्शन से कटे चालानों को लोक अदालत में शामिल करने की मांग

बिहार ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने परिवहन विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर टोल प्लाजा के e-Detection कैमरों से कटे चालानों को आगामी लोक अदालत में शामिल करने की मांग की है। जानिए इससे वाहन मालिकों को कैसे मिलेगी राहत।

Bihar e Challan Lok Adalat
लोक अदालत में टोल e-Detection चालान शामिल करने की मांग- फोटो : Reporter

बिहार ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने राज्य के परिवहन विभाग के प्रधान सचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजकर टोल प्लाजा पर लगे ऑटोमैटिक ई-डिटेक्शन (e-Detection) सिस्टम से कटे ई-चालानों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में शामिल करने की पुरजोर मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान में ई-डिटेक्शन से कटे चालानों को लोक अदालत की समझौता प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है, जिससे हजारों वाहन मालिकों पर भारी वित्तीय बोझ बना हुआ है। ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने इस मुद्दे पर सरकार से तत्काल राहत देने की गुहार लगाई है।


समान प्रकृति के चालानों में असमान व्यवहार पर उठाए सवाल

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने पत्र के माध्यम से कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार लंबित ई-चालानों के त्वरित निस्तारण के लिए लोक अदालत का आयोजन किया जाता है, जिसमें मोटर वाहन अधिनियम (1988) के तहत चालान निपटाए जाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि टोल प्लाजा पर लगे कैमरों द्वारा जारी चालान भी मूल रूप से मोटर वाहन अधिनियम के तहत ही कटते हैं। ऐसे में साधारण यातायात चालानों को लोक अदालत में राहत देना और केवल टोल के ऑटोमैटिक चालानों को इससे बाहर रखना वाहन मालिकों के साथ सरासर असमान व्यवहार है।


वाहन मालिकों की प्रमुख मांगें और समाधान के सुझाव

बिहार ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने विभाग के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं कि टोल प्लाजा की ई-डिटेक्शन प्रणाली से जारी सभी चालानों को लोक अदालत की लिस्ट में शामिल किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) आपस में बेहतर समन्वय स्थापित करें। यदि इस व्यवस्था में कोई तकनीकी बाधा आ रही है, तो विभाग आपसी तालमेल से एक सरल और पारदर्शी प्रक्रिया तैयार करे ताकि भारी-भरकम जुर्माने से जूझ रहे ट्रांसपोर्टरों को कानूनी राहत मिल सके।


आगामी लोक अदालत से पहले दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह

एसोसिएशन ने परिवहन विभाग के प्रधान सचिव से अपील की है कि अगली लोक अदालत के आयोजन से पूर्व इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश और एसओपी (SOP) जारी कर दिए जाएं। राज्य भर के सभी संबंधित परिवहन अधिकारियों को दिशा-निर्देश उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है ताकि टोल से संबंधित चालानों की सूची समय पर लोक अदालत को भेजी जा सके। ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि इस कदम से न केवल वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा होगा, बल्कि न केवल राज्य के परिवहन उद्योग को भी बड़ी राहत मिलेगी बल्कि राज्स सरकार को भी करोड़ो रूपये कि आमदनी होगी।  

पटना से धीरज पराशर की रिपोर्ट