रिश्वतखोर थानेदार और दलाल को 15 साल बाद मिला पाप का फल, इतने साल के लिए गए जेल

पटना की विशेष निगरानी अदालत ने नालंदा के गिरियक थाना में तैनात रहे तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक (ASI) नरेश प्रसाद और उनके दलाल को रिश्वतखोरी के 15 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया है।

रिश्वतखोर थानेदार और दलाल को 15 साल बाद मिला पाप का फल, इतने

Patna - : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति रंग ला रही है। पटना की विशेष निगरानी अदालत ने गिरियक थाना के तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक और उनके दलाल को रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार देते हुए जेल और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।

15 साल पुराने रिश्वत कांड में न्याय की जीत

यह मामला साल 2009 का है, जब नालंदा जिले के गिरियक थाना में तैनात तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक (ASI) नरेश प्रसाद और उनके सहयोगी दलाल (नाम भी नरेश प्रसाद) को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों पर एक मामले में गिरफ्तारी से राहत देने के नाम पर शिकायतकर्ता राज कुमार राम से 10,000 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार माननीय न्यायालय ने इन्हें भ्रष्टाचार का दोषी पाया है।

कोर्ट का सख्त फैसला: जेल और जुर्माना

दिनांक 21.02.2026 को पटना के माननीय निगरानी न्यायाधीश श्री मो० रुस्तम ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13(2) के तहत दोषी ठहराया। दोषियों को एक वर्ष का सश्रम कारावास और कुल 40,000 रुपये (20-20 हजार के दो अलग-अलग दंड) के अर्थदंड की सजा दी गई है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें एक महीने की अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी।

साल 2026 की तीसरी बड़ी सजा

भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस जंग में यह साल 2026 की तीसरी बड़ी सजा है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि जांच अधिकारी (IO) विजय कुमार श्रीवास्तव ने समय पर सटीक आरोप-पत्र दाखिल किया, जबकि विशेष लोक अभियोजक श्री रितेश कुमार ने सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की। यह फैसला सरकारी तंत्र में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और देर से ही सही, सजा मुकम्मल मिलती है।

विजिलेंस ब्यूरो की अन्य बड़ी कार्रवाइयां

जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, केवल नरेश प्रसाद ही नहीं, बल्कि कई अन्य पुराने मामलों में भी ब्यूरो को सफलता मिली है। इसमें वैशाली के तत्कालीन रेंजर सीताराम चौधरी (1500 रुपये रिश्वत) और नवादा के कनीय अभियंता जय राम सिंह (3000 रुपये रिश्वत) से जुड़े मामले भी शामिल हैं। विभाग पुराने लंबित मामलों को तेजी से निष्पादित कर दोषियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने में जुटा है।