'बिहार में बड़ा सियासी खेला', भाजपा के एक MLC देंगे इस्तीफा ! दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए रखने के लिए NDA का फॉर्मूला तैयार

दीपक प्रकाश फिलहाल न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। उन्हें बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री बनाया गया था, लेकिन मंत्री बनने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर किसी सदन का सदस्य नहीं बनने को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

Deepak Prakash
Deepak Prakash- फोटो : news4nation

Deepak Prakash :  बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद फिलहाल सुरक्षित रहने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, एनडीए ने उन्हें मंत्री बनाए रखने के लिए नया राजनीतिक फॉर्मूला तैयार कर लिया है। इसके तहत भाजपा अपने एक विधान परिषद (MLC) सदस्य की सीट खाली कर सकती है, ताकि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सके और उनकी सदस्यता संबंधी संवैधानिक बाधा दूर हो जाए।


सूत्रों की मानें तो भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार से इस्तीफा दिलाने की तैयारी चल रही है। उनके इस्तीफे के बाद खाली होने वाली सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो दीपक प्रकाश संविधान के तहत किसी सदन के सदस्य बन जाएंगे और उनका मंत्री पद बरकरार रहेगा।


दरअसल, दीपक प्रकाश फिलहाल न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। उन्हें बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री बनाया गया था, लेकिन मंत्री बनने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर किसी सदन का सदस्य नहीं बनने को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।


हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान बिहार सरकार से सवाल किया था कि कोई व्यक्ति छह महीने से अधिक समय तक बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। अदालत ने इस पर राज्य सरकार से जवाब भी तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है।


इसी बीच सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद एनडीए ने संवैधानिक संकट से बचने के लिए यह रास्ता निकाला है। भाजपा अपने कोटे की एक विधान परिषद सीट छोड़कर सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा को देने पर सहमत हो गई है, ताकि दीपक प्रकाश को उच्च सदन भेजा जा सके।


हालांकि, भाजपा, राष्ट्रीय लोक मोर्चा या बिहार सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वहीं देवेश कुमार के इस्तीफे को लेकर भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सत्ता पक्ष के सूत्रों का दावा है कि इस पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।


अगर यह राजनीतिक रणनीति अमल में आती है तो दीपक प्रकाश का मंत्री पद सुरक्षित रहेगा और सुप्रीम कोर्ट में उठे संवैधानिक सवाल का भी समाधान निकल सकता है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार की राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।