BPSC result : BPSC 70वीं का फाइनल रिजल्ट हुआ जारी, श्रद्धा पांडे बनीं टॉपर, 2035 पदों के मुकाबले 2027 अभ्यर्थी हुए सफल
BPSC result : बीपीएससी परीक्षा में श्रद्धा पांडे ने कुल 593 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं, शशांक गौरव 592 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर और आयुष बिजॉय भी 592 अंक लाकर तीसरे स्थान पर रहे।
PATNA : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने इतिहास की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक, 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार ने नतीजों की आधिकारिक घोषणा की। इस परीक्षा में श्रद्धा पांडे ने कुल 593 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में प्रथम स्थान (First Rank) हासिल किया है। वहीं, शशांक गौरव 592 अंकों के साथ दूसरे स्थान (Second Rank) पर और आयुष बिजॉय भी 592 अंक लाकर तीसरे स्थान (Third Rank) पर रहे। रिजल्ट जारी होते ही सफल अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल है और आयोग जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े आगे के दिशा-निर्देश जारी करेगा।
बराबर अंक होने पर भी कैसे तय हुई सेकंड और थर्ड रैंक?
परीक्षा में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे शशांक गौरव और आयुष बिजॉय के कुल अंक (592) बिल्कुल बराबर हैं। इस पर छात्रों के मन में उठे सवाल का जवाब देते हुए आयोग के अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार ने स्पष्ट किया कि जब दो अभ्यर्थियों के कुल प्राप्तांक बराबर होते हैं, तो रैंकिंग का निर्धारण मुख्य परीक्षा (Main Written Exam) में मिले अंकों के आधार पर किया जाता है। मुख्य परीक्षा में जिसके अंक अधिक होते हैं, उसे वरीयता (Higher Rank) दी जाती है।
रिजल्ट में देरी पर बोले अध्यक्ष- '10 गुना ज्यादा अभ्यर्थियों का हुआ इंटरव्यू'
नतीजों में हुई देरी को लेकर उठ रहे सवालों पर अध्यक्ष ने पिछले वर्षों के आंकड़ों के साथ स्थिति साफ की। उन्होंने बताया, "68वीं संयुक्त परीक्षा में महज 324 वैकेंसियां थीं और 817 लोगों ने इंटरव्यू दिया था। 69वीं में सिर्फ 475 पदों के लिए 1,252 लोगों का इंटरव्यू हुआ था। इसके मुकाबले 70वीं परीक्षा आयोग के इतिहास की सबसे बड़ी भर्ती थी, जिसमें 2,035 वैकेंसियां थीं और इसके लिए 5,450 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू लिया गया। इंटरव्यू देने वालों की संख्या सामान्य से 10 गुना ज्यादा थी, इसलिए प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक था।" उन्होंने बताया कि कुल 2,035 सीटों में से 2,027 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं, जबकि 8 सीटें दिव्यांग (हैंडीकैप) श्रेणी के उम्मीदवार न मिलने के कारण खाली रह गईं।
कदाचार पर कड़ा रुख, फेक कैंडिडेट नहीं कर पाए प्रवेश
परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर अध्यक्ष ने कहा कि अक्सर कई परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करके लोग पास हो जाते हैं, लेकिन बीपीएससी में परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक बेहद कड़ी सुरक्षा और जांच की व्यवस्था की गई थी। इसी चाक-चौबंद सुरक्षा का नतीजा रहा कि कोई भी 'फेक कैंडिडेट' (फर्जी अभ्यर्थी) सिस्टम में प्रवेश नहीं कर पाया और पूरी तरह योग्य उम्मीदवारों का ही चयन हुआ है।
विवादों, कोर्ट-कचहरी और आंदोलन के बाद खत्म हुआ इंतजार
उल्लेखनीय है कि इस परीक्षा का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। 4 जनवरी 2025 को प्रारंभिक परीक्षा के दौरान पटना के बापू परीक्षा परिसर केंद्र पर हुए हंगामे के बाद वहां की परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी, जिसे आयोग ने बाद में दोबारा आयोजित कराया। इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने की मांग को लेकर करीब तीन महीने तक सड़क पर आंदोलन चला, जिसमें बाहरी तत्वों के शामिल होने के आरोप भी लगे। मामला पटना हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से आंदोलनकारियों को राहत नहीं मिली। अब तमाम कानूनी अड़चनों और कड़े संघर्ष के बाद इस ऐतिहासिक भर्ती प्रक्रिया का सफल समापन हो गया है।
नरोत्तम की रिपोर्ट