Bihar Politics: कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन का बड़ा खुलासा, बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए दिया था ऑफर, लेकिन...

Bihar Politics: कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने बड़ा खुलाया किया है। अभिषेक रंजन ने आरोप लगाया है कि राज्यसभा चुनाव में बीजेपी नेताओं ने उन्होंने ऑफिर दिया था साथ उन्होंने हॉर्स ट्रेडिंग के भी संकेत दिए हैं।

अभिषेक रंजन
कांग्रेस एमएलए का खुलासा - फोटो : social media

बिहार के हालिया राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है। चनपटिया से कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने बड़ा बयान देते हुए आरोप लगाया है कि पांचवीं सीट के लिए प्रत्याशी उतारते ही एनडीए की ओर से जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के विधायकों के सहयोग से ही एनडीए पांचवीं सीट जीतने में सफल रही। अभिषेक रंजन ने कहा कि, हमसे भी संपर्क किया गया था। ऑफर दिया गया, लेकिन हमने इसे ठुकरा दिया। यह सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई है।

प्रलोभन को नहीं किया स्वीकार 

विधायक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने महागठबंधन के प्रत्याशी को ही समर्थन दिया और किसी भी प्रलोभन को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश नेतृत्व की ओर से विधायकों को लेकर कोई विशेष निर्देश नहीं दिया गया था। राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन को उस वक्त झटका लगा, जब उसके चार विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। इनमें तीन कांग्रेस और एक राजद विधायक बताए जा रहे हैं। वोटिंग के दिन इन विधायकों के फोन बंद रहे और वे संपर्क से बाहर थे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे महज संयोग नहीं, बल्कि संभावित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसे आरोप भी चर्चा में हैं।

एनडीए का राज्यसभा चुनाव में क्लीन स्वीप 

चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश राम जैसे उम्मीदवारों ने भी राज्यसभा का रास्ता तय किया। महागठबंधन के लिए यह परिणाम राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब संख्या बल होने के बावजूद एकजुटता पर सवाल उठे हैं।

‘ऑफर’ वाले बयान से बढ़ी सियासी गर्मी

अभिषेक रंजन के ‘ऑफर’ वाले बयान ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि विधायकों को प्रभावित करने की कोशिशें हुईं और यहां तक कि अनुपस्थित रहने के लिए भी प्रलोभन दिए गए हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने किसी खास विधायक का नाम नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि मौजूदा हालात में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

महागठबंधन के भीतर मंथन तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद महागठबंधन के भीतर भी आत्ममंथन शुरू हो गया है। विधायकों की अनुपस्थिति ने गठबंधन की आंतरिक एकजुटता और समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस्वी यादव के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या गठबंधन के भीतर भरोसे की कमी उभर रही है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके और असर देखने को मिल सकते हैं।

पटना से नरोत्तम की रिपोर्ट