दिल्ली में 21 मौतें, क्या पटना के हॉस्टल और होटल सुरक्षित हैं?
बिहार में हर साल आग लगने की सैकड़ों घटनाएं होती हैं। गर्मी के मौसम में शॉर्ट सर्किट, गैस सिलेंडर विस्फोट और बिजली व्यवस्था की खामियों के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। इसके बावजूद सवाल यह है कि क्या राज्य में होटल और हॉस्टलों की नियमित फायर सेफ
Bihar: दिल्ली के मालवीया नगर में होटल-रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। कई लोग जिंदा जल गए, कई धुएं की वजह से दम घुटने का शिकार हुए। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर देशभर में होटल, हॉस्टल और व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लेकिन बिहार के लिए यह खबर इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि राजधानी पटना समेत राज्य के कई शहरों में हजारों होटल, लॉज, पीजी और छात्रावास संचालित हो रहे हैं। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया और बेगूसराय जैसे शहरों में बड़ी संख्या में छात्र, पर्यटक और नौकरीपेशा लोग ऐसे भवनों में रहते हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार इस तरह के किसी बड़े हादसे से निपटने के लिए तैयार है?
बिहार में बढ़ रहे होटल और हॉस्टल, लेकिन सुरक्षा का क्या?
पटना को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की राजधानी माना जाता है। मुसल्लहपुर हाट, भिखना पहाड़ी, राजेंद्र नगर, कंकड़बाग, बोरिंग रोड और पटेल नगर जैसे इलाकों में हजारों छात्र हॉस्टलों और पीजी में रहते हैं।
वहीं राजधानी में छोटे-बड़े सैकड़ों होटल और लॉज रोजाना हजारों लोगों को ठहरने की सुविधा देते हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई होटल और लॉज में फायर अलार्म नहीं हैं, अग्निशमन यंत्र सिर्फ दिखावे के लिए लगे हैं, इमरजेंसी एग्जिट नहीं है, संकरी सीढ़ियां और बंद रास्ते हैं, बिजली की पुरानी वायरिंग का इस्तेमाल हो रहा है। यानी अगर किसी होटल और लॉज में आग लग जाए तो लोगों को सुरक्षित निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है।
बिहार में हर साल आग से होती हैं मौतें
बिहार में हर साल आग लगने की सैकड़ों घटनाएं होती हैं। गर्मी के मौसम में शॉर्ट सर्किट, गैस सिलेंडर विस्फोट और बिजली व्यवस्था की खामियों के कारण कई लोगों की जान चली जाती है।
इसके बावजूद सवाल यह है कि क्या राज्य में होटल और हॉस्टलों की नियमित फायर सेफ्टी जांच होती है?
क्या नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाता है?
या फिर किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई की परंपरा अब भी जारी है?
सरकार और प्रशासन से बड़े सवाल
दिल्ली हादसे के बाद बिहार सरकार, पटना नगर निगम और फायर विभाग से कई गंभीर सवाल पूछे जा रहे हैं
बिहार में कुल कितने होटल और हॉस्टल बिना वैध फायर एनओसी के चल रहे हैं?
पिछले एक साल में कितने हॉस्टलों और होटलों का फायर ऑडिट किया गया?
कितनी इमारतों को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर बंद कराया गया?
क्या छात्रों और यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई हुई?
क्या नगर निगम और स्थानीय प्रशासन नियमित निरीक्षण करते हैं या सिर्फ कागजी रिपोर्ट तैयार होती है?
अगर आज पटना, गया या मुजफ्फरपुर के किसी बड़े हॉस्टल में आग लग जाए तो बचाव की तैयारी कितनी है?
क्या बिहार का प्रशासन भी किसी दिल्ली जैसे हादसे के बाद जागेगा?
सबसे ज्यादा खतरे में छात्र
पटना में लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या हॉस्टलों और पीजी में रहती है।
माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर भेजते हैं, लेकिन क्या इन छात्रों की सुरक्षा की गारंटी किसी के पास है?
अगर आधी रात को किसी हॉस्टल में आग लग जाए तो क्या सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा?
यही सवाल आज हर अभिभावक के मन में है।
दिल्ली से बिहार को सबक लेने का अब समय है
दिल्ली की घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है। बिहार सरकार, नगर निगम, अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन को तुरंत राज्यभर के होटल, लॉज, हॉस्टल और पीजी की विशेष जांच शुरू करनी चाहिए।
सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि हादसे के बाद मुआवजा देना आसान है, लेकिन खोई हुई जिंदगी वापस नहीं लाई जा सकती।