Bihar officers Salary delay:डिजिटल बिहार का दावा फेल? 2300 अफसरों की सैलरी अटकी, इस प्रक्रिया से अधिकारी परेशान

Bihar officers Salary delay:तबादलों, प्रमोशन और इन्क्रीमेंट के इस मौसम में करीब 2300 गजटेड अफसरों की तनख्वाह दो महीने से अटकी पड़ी है, जिससे महकमे में बेचैनी और नाराजगी का माहौल है।...

2300 officials salaries delayed
2300 अफसरों की सैलरी अटकी- फोटो : social Media

Bihar officers Salary delay: बिहार की सियासत में इन दिनों एक नया मुद्दा गरमाया हुआ है पे-स्लिप की सुस्त रफ्तार और उससे उपजा अफसरों का आर्थिक संकट। तबादलों, प्रमोशन और इन्क्रीमेंट के इस मौसम में करीब 2300 गजटेड अफसरों की तनख्वाह दो महीने से अटकी पड़ी है, जिससे महकमे में बेचैनी और नाराज़गी का माहौल है। हुकूमत के डिजिटल दावों और जमीनी हकीकत के बीच का यह फासला अब खुलकर सामने आ गया है।

दरअसल, जैसे ही किसी अफसर का तबादला या ग्रेड-पे में तब्दीली होती है, उसकी पे-स्लिप जारी करने की प्रक्रिया बिल्कुल नई नियुक्ति की तरह शुरू होती है। दस्तावेजों की बारीक जांच, फाइलों का ढेर और कागजी खानापूर्ति इन सबने मिलकर इस अमल को बेहद सुस्त बना दिया है। नतीजा ये कि नई पे-स्लिप आने में करीब दो महीने लग जाते हैं, और जब तक यह जारी नहीं होती, वेतन खाते में नहीं पहुंचता।

बिहार प्रशासनिक सेवा, राजस्व सेवा और सूचना सेवा जैसे कई कैडरों के अफसर इस लेटलतीफी का खामियाजा भुगत रहे हैं। मैनपावर की कमी और एक ही विंडो वित्त विभाग के वैयक्तिक दावा कोषांग पर बढ़ते बोझ ने हालात को और बिगाड़ दिया है। अफसरों को ट्रांसफर ऑर्डर, ज्वॉइनिंग लेटर और पुरानी पे-स्लिप जैसे तमाम दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं, जिसके बाद लंबा वेरिफिकेशन चलता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सर्विस हिस्ट्री ऑनलाइन मौजूद है, तो फिर ऑटो-वेरिफिकेशन का सिस्टम क्यों नहीं? जहां भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों का वेरिफिकेशन ऑटो मोड में हो जाता है और उनकी सैलरी नहीं रुकती, वहीं राज्य सेवाओं के अफसरों को सबूतों के साथ दर-दर भटकना पड़ रहा है।

सियासी गलियारों में इसे सिस्टम की खामी और प्रशासनिक लापरवाही बताया जा रहा है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी करार दे रहा है, तो सरकार की ओर से सुधार का भरोसा दिया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी माना है कि प्रक्रिया को तेज करने और ऑटो-वेरिफिकेशन की संभावना पर गौर किया जाएगा। अब देखना यह है कि यह मसला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या वाकई सिस्टम में कोई ठोस सुधार देखने को मिलता है। फिलहाल, अफसरों की निगाहें अपनी अटकी सैलरी और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।