‘सूखे नशे’ से बर्बाद हो रहा बिहार ! न शराब तस्करी पर नकेल, ना ही ड्रग्स पर रोक, सम्राट चौधरी को सबसे बड़ी चुनौती
बिहार में नशे का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जो भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। खासकर सूखे नशे ने बिहार में तेजी से पांव पसारा है जिसकी भयावहता हैरान करती है
Dry intoxication is in Bihar: बिहार में वर्ष 2016 में लागू शराबबंदी के बाद भले ही सरकार ने शराब पर नियंत्रण का दावा किया हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। स्थिति है कि बिहार में न तो शराब की तस्करी रुक रही है और ना ही सूखे नशे पर नियंत्रण हुआ है। एक ओर जहां अवैध शराब की तस्करी लगातार जारी है, वहीं दूसरी ओर ‘सूखे नशे’ यानी गांजा, हेरोइन, अफीम और इंजेक्शन जैसे मादक पदार्थों का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। हाल के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि राज्य में नशे का स्वरूप बदल रहा है।
शराब तस्करी की भयावहता का पता इसी से चलता है कि शराबबंदी कानून लागू होने से लेकर दिसंबर 2025 तक बिहार में लगभग 10 लाख मामले दर्ज किए गए हैं और 16 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 2025 की तुलना में 2026 में औसत प्रतिमाह शराब की बरामदगी में 18% की वृद्धि देखी गई है। साल 2024 में कुल 34.61 लाख लीटर अवैध शराब जब्त की गई, यानी हर महीने औसतन 2.88 लाख लीटर। वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 37.75 लाख लीटर हो गया, जो औसतन 3.14 लाख लीटर प्रति माह है। वहीं 2026 के फरवरी तक 7.41 लाख लीटर शराब बरामद, यानी औसतन 3.70 लाख लीटर प्रति माह जो 2025 के मुकाबले 18% अधिक है।
सूखे नशे का बढ़ता नेटवर्क
शराब पर सख्ती के बीच बिहार में ‘ड्राई ड्रग्स’ का कारोबार तेजी से फैल रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की सालाना रिपोर्ट और बिहार विधानसभा में पेश सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2016: 1,08,000 किलो गांजा, 115 किलो चरस, 2017: 28,887 किलो गांजा, 244 किलो चरस, 2018: 13,897 किलो गांजा, 251 किलो चरस, 2019: 8,514 किलो गांजा, 52 किलो चरस, 2020: 16,607 किलो गांजा, 189 किलो चरस, 2021: 27,359 किलो गांजा, 364 किलो चरस, 2022: 25,023 किलो गांजा, 150 किलो चरस, 2023: 7,153 किलो गांजा, 59 किलो चरस, 2024: 18,356 किलो गांजा, 195 किलो चरस, और 2025: 27,884 किलो गांजा, 352 किलो चरस बरामद हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि 2016 में गांजा की बरामदगी में अचानक भारी उछाल आया, इसके बाद कुछ वर्षों तक गिरावट रही, लेकिन 2020 के बाद फिर से तेजी देखी गई और 2025 तक यह फिर उच्च स्तर पर पहुंच गई।

हेरोइन, अफीम और पॉपी स्ट्रॉ का बढ़ा चलन
इसी तरह हेरोइन, अफीम और पॉपी स्ट्रॉ की बरामदगी भी लगातार बढ़ रही है। जैसे 2015: हेरोइन 1.12, अफीम 1.97, पॉपी स्ट्रॉ 0, 2016: हेरोइन 116, अफीम 1.04, पॉपी स्ट्रॉ 16, 2017: हेरोइन 557, अफीम 7.56, पॉपी स्ट्रॉ 329, 2018: हेरोइन 3.2, अफीम 3.2, पॉपी स्ट्रॉ 0, 2019: हेरोइन 1.573, अफीम 4.5, पॉपी स्ट्रॉ 0, 2020: हेरोइन 2.387, अफीम 364, पॉपी स्ट्रॉ 0, 2021: हेरोइन 1.583, अफीम 9.62, पॉपी स्ट्रॉ 0, 2022: हेरोइन 4.480, अफीम 31, पॉपी स्ट्रॉ 3.9, 2023: हेरोइन 16.406, अफीम 1.5, पॉपी स्ट्रॉ 3.9, 2024: हेरोइन 4.793, अफीम 53, पॉपी स्ट्रॉ 0, 2025: हेरोइन 2.378, अफीम 138, पॉपी स्ट्रॉ 0 (सभी मात्रा किलो में) में बरामद हुआ।

इंजेक्शन, कफ सिरप और टैबलेट्स
बिहार में नशीले इंजेक्शन, कोडीन युक्त कफ सिरप और टैबलेट्स के दुरुपयोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जैसे 2016: 12,880 इंजेक्शन और 20,200 कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद हुआ जो 2017: 75 इंजेक्शन, 446 कफ सिरप, 25 टैबलेट्स, 2018: 42 इंजेक्शन, 282 कफ सिरप, 20 टैबलेट्स, 2019: 20 इंजेक्शन, 10 कफ सिरप, 20 टैबलेट्स, 2020: 979 इंजेक्शन, 1,79,803 कफ सिरप, 56 टैबलेट्स, 2021: 9,144 इंजेक्शन, 6,19,084 कफ सिरप, 10,16,184 टैबलेट्स, 2022: 58,259 इंजेक्शन, 1,28,290 कफ सिरप, 58,223 टैबलेट्स, 2023: 11,549 इंजेक्शन, 1,15,440 कफ सिरप, 1,87,993 टैबलेट्स, 2024: 63,206 इंजेक्शन, 2,07,405 कफ सिरप, 3,05,071 टैबलेट्स और 2025: 23,422 इंजेक्शन, 3,25,093 कफ सिरप, 3,42,678 टैबलेट्स के रूप में बरामद हुआ। ये आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि राज्य में सूखे नशे का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है जिससे युवाओं का बड़ा वर्ग प्रभावित है।

2026 में और बढ़ा
सूखे मादक पदार्थों की बरामदगी भी तेजी हो रही है। इस वर्ष फरवरी तक 7 हजार 415 किलो गांजा, 14 किलो चरस, 8.64 किलो हेरोइन या ब्राउन सुगर, 53 किलो डोडा के अलावा 50 हजार 439 कैप्सूल, 5 हजार 774 पीस इंजेक्शन और 9 हजार 743 लीटर कफ सिरप की बरामदगी की गई है।
सीएम सम्राट की बढ़ेगी चिंता
बिहार में बनी पहली भाजपा सरकार के पहले मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी ने विधानसभा में अपनी सरकार की दृढ इच्छाशक्ति शराबबंदी को लागू रखने में व्यक्त की है। बावजूद इसके आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि राज्य सरकार के लिए शराबबंदी को प्रभावी तरीके से लागू करना और सूखे नशे पर नकले कसना दो बड़ी चुनौतियां हैं। यहां तक कि सूखे नशे को लेकर बिहार में कई विधायकों ने भी चिंता जाहिर की है। विपक्ष जहां सरकार पर इसे लेकर हमलावर रहा है वहीं सरकार में शामिल जदयू के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह हाल के दिनों में कई बार बिहार में सूखे नशे के बढ़ते चलन पर चिंता जाहिर की है। ऐसे में सम्राट चौधरी की सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।