Bihar Tender Scam: बुडको टेंडर घोटाले में ED का बड़ा एक्शन! रिशु श्री 15 कंपनियां रडार पर, सचिवालय से लेकर सत्ता के गलियारों तक मचा हड़कंप
Bihar Tender Scam: बहुचर्चित टेंडर घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने अब अपना शिकंजा बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) तक कस दिया है।
Bihar Tender Scam: बिहार के प्रशासनिक और सियासी गलियारों से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। बहुचर्चित टेंडर घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने अब अपना शिकंजा बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) तक कस दिया है। जांच एजेंसी की ताजा कार्रवाई के बाद नगर विकास विभाग, बुडको मुख्यालय और सत्ता के केंद्रों में खलबली मच गई है। सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय ने नगर विकास विभाग को आधिकारिक पत्र भेजकर बुडको से जुड़ी 15 बड़ी कंपनियों का पूरा ब्योरा मांगा है। जांच एजेंसी ने वर्ष 2016 से 2025 तक इन कंपनियों को आवंटित किए गए सभी टेंडर, एग्रीमेंट, भुगतान विवरण और परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। प्रवर्तन निदेशालय विशेष रूप से रिशु श्री और उनसे जुड़े कारोबारी नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
जिन कंपनियों की फाइलें अब जांच एजेंसी के निशाने पर हैं, उनमें रिलायबल एंटरप्राइजेज, रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, श्री नेस्टबिल्ड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, अर्बन एनवायर्नमेंटल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, साई आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीताश्री एंटरप्राइजेज, तोशिबा वाटर सॉल्यूशंस, केवड़िया कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, भुगन इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, जैनम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, ऑर्गेनिका प्राइवेट लिमिटेड, ऑर्गेनिका 121 प्राइवेट लिमिटेड, जेएम एनवायरो प्राइवेट लिमिटेड, वीए टेक वबाग प्राइवेट लिमिटेड और ईएमएस इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।बताया जा रहा है कि इन कंपनियों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, जलापूर्ति योजनाओं, शहरी सौंदर्यीकरण और आधारभूत संरचना विकास से जुड़े सैकड़ों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स सौंपे गए थे। अब प्रवर्तन निदेशालय यह खंगाल रही है कि टेंडर आवंटन प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई, तकनीकी और वित्तीय दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी तो नहीं की गई और सरकारी धन के भुगतान का पैसा आखिर किन-किन रास्तों से गुजरा।
सूत्रों का दावा है कि जांच का फोकस केवल टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित मनी ट्रेल, संदिग्ध लेन-देन और संभावित वित्तीय अनियमितताओं पर भी है। यही वजह है कि पिछले नौ वर्षों के रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय के पत्र के बाद नगर विकास विभाग ने भी तत्काल सक्रियता दिखाते हुए बुडको के प्रबंध निदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है। वहीं संबंधित कंपनियों के निदेशकों पर भी जांच एजेंसी का शिकंजा और कसने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल पूरे मामले ने बिहार की नौकरशाही और राजनीतिक फिजा में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ED की यह जांच आगे किस बड़े खुलासे का रास्ता खोलती है और क्या इस कार्रवाई से किसी बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होता है।