फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं, नवीनीकरण पर हो पुनर्विचार: वशिष्ठ सिंह
जदयू विधायक बशिष्ठ सिंह ने फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के हितों से जुड़े गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह समझौता बिहार के हित में नहीं है.....
Patna : करगहर के जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विधायक बशिष्ठ सिंह ने फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के हितों से जुड़े गंभीर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह समझौता बिहार के हित में नहीं है और इसकी 30 साल की अवधि समाप्त होने से पहले इसके नवीनीकरण पर नए सिरे से विचार किया जाना चाहिए। विधायक ने सवाल उठाया कि "पानी बिहार का, नदियां बिहार की, फिर बिहार को बाढ़ और सूखे की मार क्यों?"
गंगा में गाद और बिहार पर दोहरी मार
विधायक ने कहा कि जब गंगा नदी बिहार में प्रवेश करती है, तो यहां नदी का फैलाव और जल प्रवाह कम हो जाता है, इसके बावजूद समझौते के तहत बांग्लादेश को पानी देना पड़ता है। फरक्का बांध के निर्माण के बाद से गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा होने की समस्या उत्पन्न हुई है, जिसका खामियाजा पूरे राज्य को भुगतना पड़ता है। बिहार को हर साल एक तरफ जहां भीषण बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ती है, वहीं दूसरी तरफ कई क्षेत्रों में पानी की कमी और सूखे के हालात बन जाते हैं।
पूर्व सीएम नीतीश कुमार और राज्यसभा सांसद संजय झा ने उठाया है मुद्दा
विधायक बशिष्ठ सिंह ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुरुआत से ही फरक्का बराज और इससे जुड़ी जल समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने भी इस संवेदनशील मुद्दे को संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में प्रमुखता से उठाया है, जिस पर केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बिहार की मांग को उचित ठहराया है।
बिहार के जल हितों को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता
पार्टी का पक्ष रखते हुए उन्होंने साफ किया कि यदि कोई भी समझौता बिहार के हक में नहीं है, तो उसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। राज्य के किसानों, सिंचाई व्यवस्था, जल संसाधनों और आम जनता के हितों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, और बिहार की नदियों से जुड़े किसी भी फैसले में राज्य की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नरोत्तम की रिपोर्ट