Fodder Scam: लालू यादव जाएंगे जेल ! सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की याचिका पर होगी सुनवाई, आज आएगा बड़ा फैसला
Fodder Scam: राजद सुप्रीमो लालू यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने वाली है। सुप्रीम कोर्ट में आज लालू यादव के जमानत को रद्द करने को लेकर सुनवाई होनी है। सीबीआई ने लालू यादव की जमानत रद्द करने की याचिका दायर की है।
Fodder Scam: राजद सुप्रीमो लालू यादव की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है। आज दिल्ली में लालू यादव को लेकर अहम सुनवाई होनी है। चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। सीबीआई की जमानत रद्द करने की याचिका पर आज सुनवाई होगी। सीबीआई के बाद झारखंड सरकार ने भी लालू यादव की जमानत रद्द करने की मांग की है। बता दें कि झारखंड हाईकोर्ट ने लालू यादव को चारा घोटाला मामले में जमानत दी थी। वहीं अब इस मामले में अहम सुनवाई होनी है।
लालू यादव जाएंगे जेल?
अगर सुप्रीम कोर्ट लालू यादव के खिलाफ फैसला सुनाती है तो राजद सुप्रीमो को जेल भी जाना पड़ सकता है। मालूम हो कि बीते दिन लैंड फॉर जॉब मामले में भी लालू यादव राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए थे। जहां उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया था। बता दें कि, चारा घोटाला बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला है, जिसमें सरकारी खजाने से लगभग ₹950 करोड़ की अवैध निकासी की गई थी। यह घोटाला 1990 के दशक में सामने आया था, जब लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे।
घोटाला क्या था?
यह घोटाला मूल रूप से बिहार के पशुपालन विभाग से जुड़ा था। इसमें अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत से पशुओं के चारे, दवाओं और खेती के उपकरणों के नाम पर करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से निकाले गए, जबकि वास्तव में ऐसी कोई खरीद नहीं हुई थी। घोटाले के कुछ प्रमुख और हैरान करने वाले बिंदु थे कागजों पर हजारों "काल्पनिक" गाय-भैंसें दिखाई गईं और उनके चारे और दवाइयों के लिए पैसे निकाले गए। चारे की ढुलाई के लिए जिन वाहनों के नंबर बिलों में दिए गए थे, जाँच में वे स्कूटर, मोटरसाइकिल और मोपेड के नंबर निकले। कई जिलों (जैसे चाईबासा, देवघर, दुमका, डोरंडा) के सरकारी खजानों (Treasuries) से आवंटित बजट से कई गुना अधिक राशि फर्जी बिलों के माध्यम से निकाली गई। एक बिल में भैंसों के सींग चमकाने के लिए हजारों टन सरसों तेल खरीदने का दावा किया गया था।
कैसे खुला मामला
जानकारी अनुसार जनवरी 1996 में चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के दफ्तरों पर छापेमारी की, जिससे इस बड़े फर्जीवाड़े का पता चला। पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मार्च 1996 में इसकी जाँच CBI को सौंपी गई। जाँच में नाम आने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद लालू यादव को 1997 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया।
लालू यादव पर कानूनी कार्रवाई
CBI ने इस घोटाले से जुड़े 53 अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। लालू यादव को मुख्य रूप से 5 बड़े मामलों में दोषी ठहराया गया है। चाईबासा मामले में (RC 20A/96): ₹37.7 करोड़ की निकासी के लिए 2013 में पहली बार सजा मिली। देवघर मामले में ₹89.27 लाख की निकासी के लिए 2017 में सजा सुनाई गई। दूसरे चाईबासा मामले (दूसरा) में ₹33.13 करोड़ की निकासी के लिए 2018 में सजा मिली। दुमका मामला में ₹3.76 करोड़ की निकासी के लिए 14 साल की सबसे कड़ी सजा दी गई। डोरंडा मामले में ₹139.35 करोड़ की निकासी (सबसे बड़ा मामला) के लिए 2022 में सजा सुनाई गई। लालू यादव इन मामलों में आधी सजा काटने और खराब स्वास्थ्य के आधार पर फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। दूसरी ओर बिहार सरकार अब घोटाले की राशि वसूलने के लिए दोषियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी कर रही है।