भ्रष्टाचार में फंसे अररिया SDO को 7 साल की जेल, पत्नी समेत 30 लाख का जुर्माना लगाया, निगरानी की कार्रवाई से मचा हड़कंप
बिहार निगरानी ब्यूरो ने 8 अप्रैल 2026 को अररिया के SDO लाल बाबू प्रसाद और उनकी पत्नी गुना प्रमाती को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया। 7 वर्ष कैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
Patna - बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आज 8 अप्रैल 2026 को एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में अररिया जिले के तत्कालीन SDO लाल बाबू प्रसाद और उनकी पत्नी गुना प्रमाती को दोषी ठहराया है। विशेष अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)(d) और 13(2) के तहत दोषसिद्ध किया। दोनों पर 25 लाख रुपये की संपत्ति से अधिक की अघोषित संपत्ति रखने का आरोप था।
आरोप और सजा का विवरण
निगरानी ब्यूरो की जांच में लाल बाबू प्रसाद पर 25 लाख रुपये की अघोषित संपत्ति का मामला साबित हुआ। अदालत ने दोनों को 7 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसका भुगतान न करने पर अतिरिक्त 6 माह की सजा होगी। यह फैसला माननीय विशेष न्यायाधीश, निगरानी ब्यूरो द्वारा दिया गया।
बिहार सरकार की सख्ती का संदेश
यह conviction बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है। वर्ष 2026 में अब तक निगरानी ब्यूरो द्वारा 7 भ्रष्टाचारियों को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 30 तक पहुंच गई थी। विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
क्या था पूरा मामला?
लाल बाबू प्रसाद पर सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति जमा करने का आरोप था। उनकी पत्नी गुना प्रमाती भी इस मामले में सह-आरोपी थीं। निगरानी ब्यूरो ने लंबी जांच के बाद चालान पेश किया, जिस पर विशेष अदालत ने आज फैसला सुनाया। दोनों दोषियों को तुरंत जेल भेज दिया गया है।
आगे की कार्रवाई और प्रभाव
निगरानी ब्यूरो ने सभी संबंधित दस्तावेजों को सील कर लिया है और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह फैसला बिहार के सरकारी अधिकारियों के लिए चेतावनी का काम करेगा। विभाग ने अन्य लंबित मामलों की जांच तेज करने का भी संकेत दिया है।
रिपोर्ट - अनिल कुमार