नेपाल में लगातार भूस्खलन और बाढ़ प्रकृति का बड़ा अलर्ट: डॉ. सुनील कुमार चौधरी
नेपाल के गोरखा जिले की बूढ़ी गंडकी नदी में आई आपदा पर पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता एवं बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के पूर्व महासचिव डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने गहरी चिंता व्यक्त की है...
Patna : बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता एवं बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के पूर्व महासचिव डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने हाल ही में अक्टूबर 2026 में नेपाल के गोरखा जिले की बूढ़ी गंडकी नदी में आई आपदा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नेपाल में बार-बार हो रहे भूस्खलन और बाढ़ केवल आकस्मिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन, जलवायु परिवर्तन और हिमालय क्षेत्र की अत्यंत संवेदनशील भौगोलिक स्थिति में आ रहे खतरनाक बदलावों का संकेत हैं।
जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव
डॉ. चौधरी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पैटर्न पूरी तरह बिगड़ चुका है। बेहद कम समय में होने वाली मूसलाधार बारिश और क्लाउडबर्स्ट से पहाड़ों की मिट्टी ढीली पड़ जाती है। इसके साथ ही, तापमान में वृद्धि के कारण नेपाल-चीन सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे हिमताल फटने (Glacial Lake Outbursts) तथा अचानक बाढ़ (Flash Floods) की घटनाएं खतरनाक रूप से बढ़ गई हैं।
हिमालय का नाजुक भूगोल और मानवीय गतिविधियां
नेपाल की भौगोलिक संरचना का बड़ा हिस्सा 'यंग फोल्ड माउंटेन्स' (कच्चे पहाड़ों) से बना है, जो लगातार आने वाले भूकंपीय झटकों से अंदरूनी तौर पर कमजोर हो चुका है। हाल ही में गोरखा और दोलखा जिलों में भूस्खलन से नदियों के मार्ग में अस्थायी झीलें बनीं, जिनके फटने से तबाही मची। इसके ऊपर से अनियोजित अवसंरचना विकास, पहाड़ों को काटकर बनाई जा रही सड़कें, जलविद्युत परियोजनाएं और वनों की अंधाधुंध कटाई पहाड़ों की प्राकृतिक ढलान को और अधिक अस्थिर कर रही है।
आपदा प्रबंधन और बचाव के महत्वपूर्ण उपाय
डॉ. चौधरी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर वैश्विक और स्थानीय स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में स्थितियां और भी भयावह होंगी। उन्होंने सरकार और समाज को सुझाव दिए:
- पारंपरिक तरीकों की जगह अत्याधुनिक एडवांस अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) लागू किया जाए।
- विकास कार्यों में पर्यावरण-अनुकूल विकास (Eco-friendly Infrastructure) मॉडल को प्राथमिकता दी जाए।
- लोगों को आपदा-रोधी निर्माण (Disaster Resilient Construction) और प्राकृतिक खतरों के प्रति बड़े पैमाने पर जागरूक किया जाए।
क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य का संकल्प
नेपाल में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का सीधा असर बिहार और भारत के निचले मैदानी इलाकों पर भी पड़ता है। नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि और गाद (Silt) के जमाव से भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा हर साल बना रहता है। इस चुनौती से निपटने के लिए विज्ञान, तकनीक और जन-जागरूकता को मिलाकर काम करना बेहद आवश्यक है।