Bihar Budget 2026 : 'बीमारू' छवि से ₹3.47 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था तक, जानिए 20 वर्षों में नीतीश सरकार ने कैसे छुआ जादुई आंकड़ा

Bihar Budget 2026 : 3 फरवरी को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव सदन के पटल पर बजट पेश किया. कुल 3.47 लाख करोड़ का बजट पेश किया गया है......पढ़िए आगे

Bihar Budget 2026 : 'बीमारू' छवि से ₹3.47 लाख करोड़ की अर्थव
बिहार ने बनाया कीर्तिमान - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार विधानमंडल का बजट सत्र 02 फरवरी से शुरू हो गया है, जो राज्य के आर्थिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित नई एनडीए सरकार का पहला बजट मंगलवार को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन के पटल पर रखा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,47,589 करोड़ का यह भारी-भरकम बजट पेश कर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार अब देश की विकास यात्रा में पीछे नहीं रहने वाला है।

शून्य से शिखर तक: 2005 का वह दौर

इस वित्तीय छलांग को समझने के लिए हमें दो दशक पीछे मुड़कर देखना होगा। साल 2005 में जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली थी, तब बिहार की माली हालत अत्यंत दयनीय थी। उस वित्तीय वर्ष में प्रदेश का कुल बजट मात्र ₹22,568 करोड़ था। इसका 80 फीसदी हिस्सा सिर्फ वेतन और पेंशन में चला जाता था। मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही वित्तीय अनुशासन और आधारभूत ढांचे पर काम शुरू किया। उनके पहले पूर्ण बजट (2006-07) में तत्कालीन वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने ₹3,742 करोड़ का इजाफा करते हुए ₹26,310 करोड़ का बजट पेश किया था। इसी दौर में बिहार की सड़कों और पुलों के निर्माण की नींव रखी गई थी।

कृषि रोडमैप और चुनावी सफलताओं का दौर

विकास की भूख यहीं नहीं रुकी। वित्तीय वर्ष 2007-08 से पहले मुख्यमंत्री ने 'कृषि रोडमैप' का ऐलान किया, जिसका सीधा असर बजट पर दिखा और दायरा ₹32,000 करोड़ के पार निकल गया। 2009-10 तक बजट ₹44,525 करोड़ पहुँचा। चुनावी साल 2010 में एनडीए सरकार ने पहली बार ₹50 हजार करोड़ का जादुई आंकड़ा पार किया। सुशासन और महिला सशक्तीकरण के दम पर नीतीश कुमार को 210 सीटों का प्रचंड बहुमत मिला, जिसके बाद जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए 2011-12 के बजट में एकमुश्त ₹12,171 करोड़ की बढ़ोतरी कर इसे ₹65,586 करोड़ तक पहुँचाया गया।

सियासी उथल-पुथल और 'एक लाख करोड़' का कीर्तिमान

साल 2013 में एनडीए से नाता टूटने के बाद नीतीश कुमार ने स्वयं वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली और वित्तीय वर्ष 2014-15 में इतिहास रचते हुए पहली बार ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट पेश किया। इसके बाद राजनीतिक समीकरण बदलते रहे, लेकिन बजट का आकार बढ़ता रहा। बिहार धीरे धीरे विकास की तेज दौड़ लगाने लगा।

मांझी और महागठबंधन काल

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की सरकार में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने 2015-16 में ₹1.20 लाख करोड़ का बजट पेश किया। इसके बाद महागठबंधन सरकार में अब्दुल बारी सिद्दीकी ने 'सात निश्चय' और 'शराबबंदी' जैसी योजनाओं को केंद्र में रखकर 2017-18 तक बजट को ₹1.60 लाख करोड़ तक पहुँचाया। जिसने कीर्तिमान स्थापित किया।

एनडीए की वापसी और 3 लाख करोड़ का सफर

2017 में एनडीए की वापसी के बाद सुशील कुमार मोदी ने फिर कमान संभाली और 2020 के चुनावी वर्ष में बजट को ₹2 लाख करोड़ के पार पहुँचा दिया। इसके बाद तारकिशोर प्रसाद और फिर महागठबंधन की सरकार में विजय चौधरी ने इस क्रम को जारी रखा। जनवरी 2024 में एनडीए की फिर से वापसी हुई और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने पिछले साल ₹3.17 लाख करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया था।

20 साल में 15  गुना बड़ी हुई बिहार की ताकत

आज वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा पेश किया गया ₹3.47 लाख करोड़ का बजट पिछले साल के मुकाबले ₹40,000 करोड़ अधिक है। यह वृद्धि दर्शाती है कि पिछले 20 वर्षों में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार का बजट करीब 14 गुना बढ़ चुका है। ₹22 हजार करोड़ से शुरू हुआ यह सफर आज साढे तीन लाख करोड़ के करीब है, जो राज्य में बढ़ते निवेश, बेहतर कर संग्रहण और सुदृढ़ प्रशासनिक ढांचे की कहानी कहता है। यह बजट अब न केवल सड़कों और बिजली, बल्कि 'स्मार्ट विलेज', आईटी और रोजगार सृजन की नई दिशा की ओर संकेत कर रहा है।