Bihar Flood: गंडक का जलस्तर तेजी से घटा, बिहार पर मंडराया बाढ़ का खतरा टला, निगरानी जारी
Bihar Flood: नेपाल और बिहार के लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। गंडक यानी नारायणी नदी का जलस्तर अब तेजी से नीचे उतरने लगा है।
Bihar Flood: नेपाल और बिहार के लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। गंडक यानी नारायणी नदी का जलस्तर अब तेजी से नीचे उतरने लगा है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर पानी का स्तर घटकर करीब 81 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में मंडरा रहा बाढ़ का बड़ा खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है।सबसे बड़ी राहत यह है कि त्रिशूली नदी का पानी नारायणी नदी के रास्ते सुरक्षित रूप से आगे निकल चुका है। इससे गंडक नदी में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह आने की आशंका कम हुई है। प्रशासन हालांकि अभी भी पूरी तरह मुस्तैद है और नदी के जलस्तर पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है।
प्राकृतिक बांध टूटने से आया था जलप्रलय
दरअसल, नेपाल और तिब्बत की सीमा से सटे इलाके में हालात बेहद संगीन हो गए थे। चीन के पोइकू क्षेत्र से अचानक आए जलप्रवाह ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था।भूकंप के झटकों से पहाड़ और बर्फ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में जा गिरा। इसके साथ भारी मलबा भी नदी में पहुंच गया। मलबे और बर्फ के जमाव से नदी का रास्ता रुक गया और वहां एक प्राकृतिक बांध बन गया।
इसके बाद पानी का दबाव लगातार बढ़ता गया। जब अस्थायी बांध अचानक टूट गया तो पानी ने बेहद तेज रफ्तार से नीचे की ओर रुख किया और ऊपरी इलाकों में विनाशकारी फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो गई।हालांकि निचले इलाकों में बारिश नहीं होने और पानी का बहाव तेजी से आगे निकल जाने से स्थिति ज्यादा भयावह होने से बच गई। यही वजह रही कि बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में संभावित बड़े संकट का खतरा फिलहाल कम हो गया है।
रसुवा में भारी तबाही, सैकड़ों लोग लापता
तिब्बत से लगे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हादसे में अब तक 157 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 133 भारतीयों समेत करीब 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ से 12 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा ने पहाड़ी इलाकों में तबाही का मंजर पैदा कर दिया। राहत और बचाव एजेंसियां लापता लोगों की तलाश और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में आई तबाही के बीच भारत ने भी तत्काल मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने बुधवार रात राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी। भारतीय वायुसेना के C-130J विमान ने रात करीब 8:35 बजे हिंडन वायुसेना स्टेशन से काठमांडू के लिए उड़ान भरी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही पर गहरी संवेदना जताई और मुश्किल की इस घड़ी में नेपाल के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल में बाढ़ से निपटने के प्रयासों में मदद के लिए 10 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत सामग्री तथा जरूरी दवाएं भेजी हैं।
बिहार में पहले ही कर ली गई थी तैयारी
नेपाल से आने वाले संभावित तेज जलप्रवाह को देखते हुए बिहार प्रशासन ने पहले ही एहतियाती कदम उठा लिए थे। गंडक बराज से पहले करीब एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, ताकि नेपाल से आने वाले पानी के लिए बैराज में पर्याप्त जगह बनाई जा सके।बैराज से जुड़ी कई नहरों को भी खाली किया गया है। इसका मकसद अचानक बढ़ने वाले जलप्रवाह को सुरक्षित तरीके से मैनेज करना था।गंडक नदी के किनारे बसे संवेदनशील इलाकों में लोगों को जरूरत के मुताबिक ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमें तैनात हैं।
खतरा टला, लेकिन निगरानी जारी
गंडक का जलस्तर तेजी से नीचे आने से फिलहाल बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन प्रशासन अभी लापरवाह होने के मूड में नहीं है। नदी के जलस्तर, तटबंधों और निचले इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है।यानी खतरे की घंटी फिलहाल धीमी पड़ गई है, लेकिन निगरानी का पहरा बरकरार है। नेपाल से आने वाले पानी और मौसम की स्थिति पर नजर रखते हुए प्रशासन किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।