Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी की 157 वीं और लालबहादुर शास्त्री की जयंती आज, बिहार में 44 बंदियों की होगी रिहाई,1 820 पीड़ित परिवारों को मिलेगी ये मदद

Gandhi Jayanti: तूफ़ान मोटी नहीं,महीन आवाज़ से उठता है ।/वह आवाज़,/जो मोम के दीप के समान एकान्त में जलती है,/और बाज नहीं,/कबूतर के चाल से चलती है ।/गाँधी तूफ़ान के पिता/और बाजों के भी बाज थे ।/क्योंकि वे नीरवताकी आवाज थे।-दिनकर

Gandhi Jayanti
तूफ़ान के पिता गाँधी-लालबहादुर शास्त्री की जयंती- फोटो : social Media

Gandhi Jayanti: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां—तूफ़ान मोटी नहीं,महीन आवाज़ से उठता है ।/वह आवाज़,/जो मोम के दीप के समान एकान्त में जलती है,/और बाज नहीं,/कबूतर के चाल से चलती है ।/गाँधी तूफ़ान के पिता/और बाजों के भी बाज थे ।/क्योंकि वे नीरवताकी आवाज थे।—महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और उनके संघर्ष की उस ताकत को बयां करती हैं, जिसने बिना हिंसा के ब्रिटिश हुकूमत की बुनियाद हिला दी थी। सत्य, अहिंसा और सादगी को हथियार बनाकर महात्मा गांधी ने दुनिया को संघर्ष का एक अलग रास्ता दिखाया। 2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर उनके विचारों और योगदान को याद कर रहा है।

महात्मा गांधी की आज 157वीं जयंती है। नई दिल्ली स्थित राजघाट पर बापू को श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई प्रमुख नेता राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को नमन करेंगे। 2 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र की ओर से अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

इसी दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती भी मनाई जा रही है। शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के लिए याद किए जाने वाले शास्त्री का सार्वजनिक जीवन भारतीय राजनीति के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

बिहार में गांधी जयंती पर 44 बंदियों की रिहाई

गांधी जयंती के मौके पर बिहार सरकार ने मानवीय आधार पर अलग-अलग जेलों में बंद 44 बंदियों को कारामुक्त करने का निर्णय लिया है। राज्य बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा के आधार पर यह फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, रिहा होने वाले बंदियों में लंबे समय से सजा काट रहे बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित बंदी शामिल हैं।

रिहाई पाने वालों में उम्रदराज बंदियों की संख्या अधिक है। इनमें 2 बंदी 90 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जबकि 8 बंदी 80 वर्ष से अधिक और 20 बंदी 70 से 80 वर्ष की आयु के हैं। एक गंभीर बीमारी से पीड़ित बंदी को भी मानवीय आधार पर कारामुक्त किया जा रहा है।इनमें एक महिला बंदी भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्णिया जेल में करीब 20 वर्ष की सजा पूरी की है। रोहतास जेल से 93 वर्षीय रामबृक्ष कोइरी, मधेपुरा से योगेश्वर यादव, 84 वर्षीय हरिवंश राम, 82 वर्षीय रामाशीष यादव समेत अन्य बंदियों को भी रिहाई दी जा रही है। सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता गंभीर बीमारी से पीड़ित बताए गए हैं।

1,820 पीड़ित परिवारों को 3.86 करोड़ की सहायता

गांधी जयंती के अवसर पर अपराध से पीड़ित परिवारों के परिजनों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। करीब 1,820 लाभार्थी परिवारों के बीच 3 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी।

सरकार के अनुसार, बंदियों की रिहाई का उद्देश्य मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक पुनर्वास और जनकल्याण की भावना को ध्यान में रखना है। लंबे समय तक कारावास की सजा काट चुके वृद्ध और असहाय बंदियों को परिवार तथा समाज के बीच वापस लौटने का अवसर मिलेगा।

हीरेश कुमार