बिहार में लॉन्च होगी 'गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना', आपदा प्रबंधन के लिए NDRF-SDRF के साथ मिलकर बनेगा सुरक्षा नेटवर्क
Patna : बिहार में आपदा प्रबंधन की रणनीति अब केवल राहत कार्यों तक सीमित न रहकर "तैयारी-केंद्रित" मॉडल पर काम करेगी। सोमवार को बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सचिव मनीष भारद्वाज और जिलाधिकारी वैशाली सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य आकर्षण बिहार में 'गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना' को लॉन्च करने की घोषणा रही, जिसका उद्देश्य डूबने की घटनाओं को न्यूनतम करना है।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा गोताखोरी का प्रशिक्षण
NDMA के सचिव मनीष भारद्वाज ने जानकारी दी कि 'गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना' के तहत गंगा और अन्य नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय युवाओं को तैराकी, गोताखोरी और जीवन रक्षा तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का लक्ष्य स्थानीय स्तर पर ऐसा प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है, जो किसी भी आपात स्थिति में सरकारी तंत्र के पहुँचने से पहले त्वरित प्रतिक्रिया देकर लोगों की जान बचा सके। इसके अलावा, तटीय समुदायों को डूबने से बचाव के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
तकनीकी नवाचार और 'सचेत ऐप' पर जोर
बैठक में राज्य की आपदा तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए तकनीकी नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की गई। मौसम पूर्वानुमान और बाढ़ की सटीक चेतावनी के लिए ISRO, IIT और TCS जैसे संस्थानों के सहयोग से एकीकृत प्रणाली विकसित की जा रही है। अधिकारियों को आपदा पूर्व चेतावनी के प्रसार हेतु “सचेत ऐप” के व्यापक उपयोग और इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (IDRN) को नियमित रूप से अपडेट रखने के निर्देश दिए गए हैं। मशीन लर्निंग और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को अब आपदा प्रबंधन का मुख्य हिस्सा बनाया जा रहा है।
सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क और सामुदायिक भागीदारी
बिहार ने आपदा मित्र, जीविका दीदियों, शिक्षकों और छात्रों को जोड़कर एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क तैयार किया है। विद्यालयों में नियमित मॉक ड्रिल और सुरक्षा शिक्षा के माध्यम से बच्चों को आपदा के समय सक्षम बनाया जा रहा है। सुरक्षित ग्राम अवधारणा के तहत स्थानीय महिलाओं और स्वयंसेवकों को सीपीआर (CPR), फर्स्ट एड और रेस्क्यू तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने कहा कि आपदा प्रबंधन को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित न रखकर इसे सामुदायिक साझा प्रयास के रूप में विकसित किया जा रहा है।
SDRF को और अधिक सुदृढ़ बनाने की समीक्षा
बैठक के दौरान राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की वर्तमान क्षमता और तैनाती की गहन समीक्षा की गई। बढ़ते जोखिमों को देखते हुए एसडीआरएफ को आधुनिक उपकरणों और बेहतर प्रशिक्षण से सुदृढ़ करने पर सहमति बनी। साथ ही, पूरे राज्य में घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (IRS) के प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया गया। उपाध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य का लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जो आपदा आने पर केवल प्रतिक्रिया न दे, बल्कि पहले से तैयार रहकर सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करे।
नरोत्तम की रिपोर्ट