बिहार में पटना के बाद अब इस शहर में बनेगा चिड़ियाघर, बस एक 'हरी झंडी' का है इंतजार

बिहार के गया जिले में राज्य का तीसरा चिड़ियाघर बनने का रास्ता साफ हो गया है। अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बताया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति मिलते ही जमारी में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

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Patna - बिहार के गया जिले के लिए पर्यावरण और पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात सामने आई है। राज्य सरकार ने गया में एक अत्याधुनिक चिड़ियाघर (Zoo) की स्थापना को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार द्वारा बुलाई गई एक उच्चस्तरीय बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने इस परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से अंतिम एनओसी प्राप्त होगी, निर्माण कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

जमारी में विकसित होगा नया वन्यजीव केंद्र

गया जिले में प्रस्तावित यह चिड़ियाघर गया-डोभी रोड के किनारे जमारी नामक स्थान पर बनाया जाएगा। पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान और राजगीर जू सफारी के बाद यह राज्य का तीसरा सबसे बड़ा वन्यजीव केंद्र होगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल वन्यजीवों का संरक्षण करना है, बल्कि गयाजी और बोधगया आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ने का एक नया विकल्प प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इस चिड़ियाघर के बनने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

'जल-जीवन-हरियाली' अभियान पर विशेष जोर

बैठक के दौरान राज्य में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान की भी समीक्षा की गई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और जल संरक्षण की दिशा में यह अभियान मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गया और अन्य जिलों में हरित आवरण (Green Cover) को बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जाए, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

हाईवे और प्रवेश मार्गों पर बनेगी 'हरित पट्टी'

शहरों को प्रदूषण मुक्त और सुंदर बनाने के लिए एक नई कार्ययोजना पर भी विमर्श हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि पटना सहित राज्य के सभी प्रमुख शहरों के प्रवेश मार्गों और विभिन्न राजमार्गों पर 'हरित पट्टी' (Green Belt) का विकास किया जाए। इससे न केवल सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ेगी, बल्कि राहगीरों को छाया मिलेगी और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहेगा। अपर मुख्य सचिव ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि विभाग जल्द ही इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर काम शुरू करेगा।

पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीव संरक्षण का संकल्प

बिहार सरकार इस जैविक उद्यान के माध्यम से लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही है। राजगीर और पटना के बीच स्थित होने के कारण गया का यह नया चिड़ियाघर एक महत्वपूर्ण ईको-टूरिज्म सर्किट का हिस्सा बनेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस उद्यान को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की योजना है, जिससे यह न केवल जानवरों का घर हो, बल्कि शिक्षा और शोध का भी केंद्र बने।