Goat Urine Benefits: अजामूत्र बना किसानों का नया सोना, 5 बकरियों से सालाना लाखों की कमाई का फॉर्मूला, छोटे किसान भी बन रहे मालामाल
Goat Urine Benefits: ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में अब एक नई इंकलाबी लहर उठ रही है, जिसे अजामूत्र क्रांति कहा जा रहा है।....
Goat Urine Benefits: ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में अब एक नई इंकलाबी लहर उठ रही है, जिसे अजामूत्र क्रांति कहा जा रहा है। पटना से सामने आई इस पहल ने बकरी पालन को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। अब यह महज दूध और मांस तक सीमित नहीं, बल्कि ‘लिक्विड गोल्ड’ यानी बकरी के मूत्र से भी किसानों की किस्मत चमकाने का जरिया बन रहा है।
लघु पशुपालन विशेषज्ञ प्रो. संजीव कुमार के मुताबिक, बकरी के मूत्र में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और इम्युनिटी बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद, स्किन केयर और जैविक खेती में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। जो चीज पहले बेकार समझी जाती थी, वही आज किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन रही है।
इस पूरी क्रांति के पीछे TGT (टोटल गोट टेक्नोलॉजी) मॉडल की अहम भूमिका है। इस मॉडल का मकसद बकरी से मिलने वाले हर संसाधन चाहे वो दूध हो, मूत्र हो या गोबर का पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग करना है। बाजार में अजामूत्र की कीमत करीब 100 रुपये प्रति लीटर है, जबकि इसकी लागत लगभग 50 रुपये प्रति लीटर आती है, यानी मुनाफा साफ और दमदार।
अगर कमाई का हिसाब लगाया जाए, तो महज 5 बकरियों से किसान सालाना करीब 1000 लीटर मूत्र इकट्ठा कर सकता है, जिससे 50,000 से 1 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। इसके अलावा 1200 किलो बकरी की लेड़ी (गोबर) से करीब 12,000 रुपये की अतिरिक्त कमाई होती है। वहीं दूध से भी सालाना लगभग 50,000 रुपये तक की आय संभव है।
यानी कुल मिलाकर एक छोटा किसान 5 बकरियों से ही सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर सकता है। यह मॉडल खासकर छोटे और भूमिहीन किसानों के लिए किसी रहमत से कम नहीं है।
इतना ही नहीं, अजामूत्र से एंटी-डैंड्रफ शैम्पू, औषधीय टॉनिक और जैविक कीटनाशक जैसे प्रोडक्ट बनाकर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उतारा जा सकता है। इससे एग्रो-स्टार्टअप और एक्सपोर्ट के नए दरवाजे खुलेंगे।
यह पहल सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद फायदेमंद है। रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और फसलों को सुरक्षित रखता है। अजामूत्र क्रांति ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच में नवाचार हो, तो छोटे संसाधनों से भी बड़ी दौलत कमाई जा सकती है और यही है आत्मनिर्भर भारत की असली तस्वीर।