डीएमआई के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त), विद्यार्थियों को दी उपाधि

Patna : आज पुरानी सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआई) का दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने 50 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की..

डीएमआई के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट

Patna : विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआई) का दीक्षांत समारोह शनिवार को पुरानी सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में हुआ। मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) पीजी डिप्लोमा (डीएम) सत्र 2024-2026 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट की उपाधि दी। निदेशक प्रो. देबीप्रसाद मिश्रा वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किए। समारोह की अध्यक्षता डीएमआई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आइएएस भानू प्रताप शर्मा ने की। विशेष रूप से डिजाइन किया हुआ कुर्ता-पायजामा, अंगवस्त्रम और चप्पल में सभी विद्यार्थी दीक्षांत समारोह में भाग लिए। 50 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। संस्थान की वेबसाइट (www.dmi.ac.in) पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से समारोह का लाइव प्रसारण भी किया गया। ग्रामीण विकास विभाग के प्रभारी सचिव हिमांशु शर्मा ने विद्यार्थियों को बिहार में ग्रामीण विकास की स्थिति से अवगत कराए। मौके पर डीएन एकेडमिक प्रो. शंकर पूर्वे तथा  बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य मौजूद थे। विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता व स्वजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए। 


एक माह में इतना व्यवस्थित कार्यक्रम नहीं देखा : राज्यपाल

इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि बिहार का राज्यपाल बने एक माह होने को है, इन दिनों में कई कार्यक्रमों में गया, लेकिन डीएमआई का कार्यक्रम सबसे व्यवस्थित और अनुशासित है। समारोह बता रहा है कि आप गुड नहीं, एक्सीलेंट हैं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत के बाद जीवन का पथ प्रारंभ होता है, जिसमें कक्षा में प्राप्त ज्ञान और अनुभव से नए पथ बनते हैं। गुड से एक्सीलेंट (बेहतर से उत्कृष्ट) बनने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं, जिन्हें आत्मसात करना होगा। इसकी पहली कड़ी है सुनने की क्षमता को बढ़ाना है। दूसरा जिम्मेवारियों को स्वीकार करने की प्रवृति विकसित करें। चुनौतीपूर्ण जिम्मेवारी मिले तो चिंतित नहीं हों, इसे अवसर के रूप में निष्पादित करें। तीसरा विषय समय में भी धैर्य नहीं खोना है। धैर्य हमारे निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ता है। चौथा नेतृत्वकर्ता बनें। टीम वर्क में विश्वास करें। एक-दूसरे के सहयोग से ही काम आसान होता है। इन कड़ियों के मिश्रण होने पर बड़ी से बड़ी चुनौती भी दिनचर्या जैसी हो जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सेना में सेवा के दौरान अपने रूटीन से भी अवगत कराया। 


वहीं निदेशक प्रो. देबीप्रसाद मिश्रा ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संस्थान एकेडमिक, ट्रेनिंग, नवाचार, डिजिटिलाइजेशन आदि के क्षेत्रों में निरंतर बेहतर कर रहा है। संस्थान का हमेशा से उद्देश्य रहा है विद्यार्थी फिल्डवर्क में ज्यादा से ज्यादा समय दे। पिछले वर्ष विद्यार्थी गुजरात के गांवों में लंबे समय तक रहकर सहकारिता की बारीकियों से अवगत हुए। अमूल, वसुंधरा जैसे संस्थानों का सहयोग भी मिला। बिहार के चातुर्दिक विकास के लिए क्या किया जा सकता है, इसपर विभिन्न क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। इसके परिणाम भी सकारात्मक मिल रहे हैं। संस्थान के सेंटर आफ एक्सीलेंस आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, उद्ययमिता आदि के क्षेत्र में बेहतर कर रहा है। विकास के विभिन्न आयाम में निरंतरता के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम किए जा रहे हैं। इसमें सरकार के कई विभागों का सहयोग प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि नए सत्र में नामांकन की प्रक्रिया जारी है। दो वर्ष की पढ़ाई में एक-तिहाई से अधिक समय विद्यार्थियों के लिए फील्ड वर्क निर्धारित है।


ग्रामीण विकास में डीएमआई के विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका

ग्रामीण विकास विभाग के प्रभारी सचिव हिमांशु शर्मा ने कहा कि यह डिग्री सिर्फ पढ़ाई पूरी करने का प्रमाण भर नहीं, बल्कि आप विकास के पैमाने को अलग तरीके से देखने की काबिलियत प्राप्त किए हैं। जिसका लाभ खुद के साथ समाज और राज्य को भी मिलेगा। उन्होंने जीविका की सफलता की कहानी से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया। कहा कि यहां से उत्तीर्ण विद्यार्थियों की की भूमिका ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण है। आप अपनी कक्षा के ज्ञान को जमीन पर लाएंगे तो लाखों लोगों के विकास के माध्यम से बनेंगे। डीएमआई का पाठ्यक्रम और पढ़ाई की शैली वैज्ञानिक और फील्ड अनुभव पर आधारित हैं। जिसका लाभ सेवा काल के दौरान मिलता है।


नए कैंपस में प्रारंभ होगा अंडर ग्रेजुएट कोर्स  

डीएमआई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आइएएस भानू प्रताप शर्मा ने समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि डीएमआई के फैकल्टी और विद्यार्थी एकेडमिक नवाचार के साथ विकास के विभिन्न आयाम में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। 2014 में राज्य सरकार ने इरमा, आनंद (गुजरात) की तर्ज पर इस स्वशासित संस्थान को स्थापित किया। डीएमआई का अत्याधुनिक सुविधाओं से संपन्न कैंपस जल्द ही बिहटा में मिलने वाला है। नए कैंपस में जाने के बाद अंडर ग्रेजुएट कोर्स भी प्रारंभ किया जाएगा।उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि दीक्षांत का मतलब लर्निंग स्टॉप नहीं होता है। सफलता के लिए स्किल और नॉलेज में निरंतर वृद्धि पहली शर्त है। हम क्लास रूप में जो सीखते हैं, उसका लाभ स्वयं व समाज को मिले, यह तभी संभव होता है जब हम अपनी क्षमता और जिज्ञासा को निरंतरता प्रदान करते हैं। जीवन में कई अवसर आएंगे जब संघर्ष की स्थिति बनेगी, ईमानदारी और लाभ में किसी का चयन करना होगा। वहां नैतिकता पर कायम रहे तो आत्मविश्वास बना रहेगा। योजना को लक्ष्य तक पहुँचाने की प्रक्रिया में सबसे अधिक योगदान टीमवर्क का होता है। टीम वर्क आदत में शामिल होना चाहिए।