नियम सबके लिए बराबर! हाजीपुर में 10 मिनट लेट पहुंचे शिक्षक को अभिभावकों ने खदेड़ा; बोले- 'जब छात्र को एंट्री नहीं, तो आपको क्यों?'

हाजीपुर स्थित सुखदेव मुसलाल (एस.एम.) कॉलेज में इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब 2 मिनट की देरी होने पर छात्रों को बाहर का रास्ता दिखाने वाले प्रशासन के सामने खुद एक शिक्षक 10 मिनट की देरी से पहुंचे।

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Vaishali - वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित सुखदेव मुसलाल (S.M.) कॉलेज में इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान शुक्रवार को जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि परीक्षा केंद्र पर तैनात एक शिक्षक जब निर्धारित समय से करीब 10 मिनट की देरी से पहुंचे, तो वहां मौजूद अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने शिक्षक को गेट पर ही रोक लिया और प्रशासन के दोहरे मापदंडों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

छात्रों के लिए 'नो एंट्री', शिक्षक के लिए ढील क्यों? 

अभिभावकों का आक्रोश इस बात को लेकर था कि परीक्षा केंद्र के प्रबंधन ने कई परीक्षार्थियों को महज 1 से 2 मिनट की देरी होने पर परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया था। जब बच्चों को गेट से ही वापस लौटा दिया गया, तो 10 मिनट की देरी से ड्यूटी पर पहुंचे शिक्षक के लिए गेट खोलने पर सवाल खड़े हो गए। स्थानीय लोगों ने दो टूक कहा कि अगर छात्र के लिए नियम सख्त हैं, तो शिक्षकों को छूट नहीं दी जा सकती।

अभिभावकों के घेरे में फंसे बेबस शिक्षक 

वीडियो फुटेज के अनुसार, आक्रोशित भीड़ ने देर से आए शिक्षक को घेर लिया और उनसे तीखे सवाल-जवाब किए। लोगों ने सवाल उठाया कि जब भविष्य बनाने आए छात्र के लिए गेट बंद हो सकता है, तो ड्यूटी पर लेट आने वाले शिक्षक के लिए विशेष रियायत क्यों? इस दौरान वहां तैनात पुलिस बल और अन्य कर्मी मूकदर्शक बने रहे, जबकि अभिभावक शिक्षक को वापस जाने पर मजबूर करते दिखे।

बिना प्रवेश किए वापस लौटे शिक्षक 

हंगामा इतना बढ़ गया कि वहां मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनता की बात का समर्थन किया। लोगों के कड़े विरोध और 'नियम सबके लिए समान' के नारों के बीच स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि देर से पहुंचे शिक्षक को अंततः बिना केंद्र में प्रवेश किए वापस उलटे पाँव लौटना पड़ा। उपस्थित परिजनों ने इस जीत को अनुशासन की मिसाल बताया।

कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल 

यह पूरी घटना अब शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान लगा रही है। एक तरफ विभाग परीक्षा में 'जीरो टॉलरेंस' और अनुशासन का पाठ पढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने ही कर्मचारी समयबद्धता की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जवाबदेही भी उतनी ही सख्ती से तय करनी चाहिए।