IGIMS paper leak: मेडिकल एग्जाम में सेटिंग का खेल? IGIMS में पेपर लीक के आरोप से मचा हड़कंप,अब जांच कमेटी करेगी सच का खुलासा

जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि मेडिकल एग्जाम में सेटिंग का खेल सिर्फ अफवाह साबित होगा या फिर वाकई कोई बड़ा खुलासा सामने आएगा?...

IGIMS Paper Leak Row Sparks Probe into Medical Exam Rigging
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़?- फोटो : social Media

IGIMS paper leak:पटना के चर्चित मेडिकल संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में एमबीबीएस और पीजी फाइनल ईयर परीक्षा को लेकर उठा विवाद अब सियासी और शैक्षणिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संगीन मामले में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के इल्ज़ाम ने पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

मामले की तह तक जाने के लिए शैक्षणिक संकाय के अध्यक्ष डॉ. ओम कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी परीक्षा से जुड़े हर पहलू चाहे वह पेपर सेटिंग हो, सुरक्षा व्यवस्था हो या परीक्षा संचालन सबकी बारीकी से पड़ताल कर रही है।संस्थान के उप निदेशक विभूति प्रसन्न सिन्हा ने साफ किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और जल्द ही कमेटी अपनी रिपोर्ट निदेशक को सौंप देगी। उन्होंने यह भी इशारा किया कि किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी सामने आने पर सख्त कार्रवाई से गुरेज नहीं किया जाएगा।

सियासी और सामाजिक हलकों में भी इस मसले को लेकर हलचल तेज हो गई है। मेडिकल एजुकेशन जैसे अहम क्षेत्र में इस तरह की कथित अनियमितता ने सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों के बीच बेचैनी साफ झलक रही है, वहीं विपक्षी सुर भी तेज होते नजर आ रहे हैं।

इसी बीच संस्थान प्रशासन ने अपने मुख्य प्रवक्ता के पद पर प्रशासनिक बदलाव करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि मीडिया के साथ जानकारी साझा करने में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

बता दें पटना के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में एमबीबीएस और पीजी परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक की खबर ने शिक्षा जगत में सनसनी फैला दी है। इस पूरे मामले को संस्थान प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लेते हुए जांच का बिगुल फूंक दिया है।सूत्रों के मुताबिक 11 मार्च 2026 को एक छात्र ने संस्थान के निदेशक डॉ. बिन्दे को एक गुमनाम ईमेल भेजकर डीन (परीक्षा) कार्यालय के कर्मी हेमंत पर गंभीर आरोप लगाए। इस मेल में दावा किया गया कि पैसे लेकर चुनिंदा छात्रों को पहले ही प्रश्नपत्र मुहैया कराया जाता है और यहां तक कि उत्तर पुस्तिकाओं में भी हेरफेर की जाती है।मामले की नजाकत को देखते हुए 17 मार्च को निदेशक कक्ष में हाई-लेवल मीटिंग बुलाई गई, लेकिन आरोपित के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से हालात और बिगड़ गए। नतीजा यह हुआ कि तत्कालीन डीन (परीक्षा) प्रकाश दुबे ने अपने ओहदे से इस्तीफा देकर सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी। इसके बाद 2 अप्रैल को डॉ. नीरू गोयल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई।

इसी दरम्यान 7 अप्रैल को एक और अहम बैठक हुई, लेकिन इसमें खुद निदेशक की गैरहाजिरी ने शक और सवालों को और गहरा कर दिया। छात्र और अभिभावक इस पूरे मसले पर पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।गौरतलब है कि निदेशक डॉ. बिन्दे पहले से ही एक अन्य मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के दायरे में हैं, जहां उन पर फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े आरोप लगे हैं। ऐसे में इस नए विवाद ने संस्थान की विश्वसनीयता पर और गहरा असर डाला है।

छात्रों का कहना है कि अगर जल्द सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो उनके करियर पर गंभीर असर पड़ सकता है। कई अभिभावकों ने भी नाम जाहिर न करने की शर्त पर सरकार से दखल देने की अपील की है।अब यह मामला सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार की मेडिकल एजुकेशन व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मुद्दा भी सियासी शोर में दब जाएगा?

रिपोर्ट- हीरेश कुमार